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चीन ने 'सीढ़ी खींचने' के आरोपों को खारिज किया, विकासशील देशों के लिए साझेदारी पर जोर दिया

चीन के विदेश मंत्रालय ने 'सीढ़ी खींचने' के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ साझा विकास के लिए 'सीढ़ी' बनाने में विश्वास रखता है। जानें क्या है पूरा मामला और इसके निहितार्थ।

स्रोत: thepaper.cn

चीन पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वह अपने विकास के लिए दूसरे विकासशील देशों की प्रगति में बाधा बनता है। हाल ही में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच चीन की भूमिका को लेकर कई तरह की बहसें चल रही हैं। आइए समझते हैं कि चीन ने क्या कहा और इसका क्या मतलब है।

मुख्य बिंदु

  • चीन का रुख स्पष्ट: विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 9 सितंबर को कहा कि चीन कभी भी किसी देश के विकास की 'सीढ़ी' नहीं खींचता, बल्कि वह 'सीढ़ी' बनाने में विश्वास रखता है। यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में आया जिनमें चीन पर 'सीढ़ी खींचने' का आरोप लगाया गया था।

  • बेल्ट एंड रोड पहल का जिक्र: प्रवक्ता ने उच्च गुणवत्ता वाली बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत चीन ने कई देशों में बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने में मदद की है। उन्होंने उदाहरण दिया कि चीन ने सड़कों, बंदरगाहों और रेलवे जैसी परियोजनाओं में निवेश किया है।

  • औद्योगिक सहयोग पर जोर: चीन ने कहा कि वह किफायती औद्योगिक उपकरण और तकनीकी उत्पाद उपलब्ध कराता है, साथ ही अपने अनुभव और तकनीक साझा करता है। इससे विकासशील देशों को अपनी औद्योगिक लागत कम करने में मदद मिलती है।

  • बाजार पहुंच का वादा: प्रवक्ता ने बताया कि चीन कई विकासशील देशों को शून्य टैरिफ निर्यात की सुविधा देता है, जिससे उन्हें चीनी बाजार में अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिलता है। यह नीति 'वैश्विक दक्षिण' के देशों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बेहतर तरीके से एकीकृत होने में मदद करती है।

  • 'सीढ़ी खींचने' की अवधारणा खारिज: माओ निंग ने कहा कि 'सीढ़ी खींचने' की बात का वैश्विक दक्षिण के देशों में कोई समर्थन नहीं है। उन्होंने इसे एक भ्रामक आख्यान बताया जो चीन और विकासशील देशों के बीच सहयोग को कमजोर करने की कोशिश है।

  • 'पारस्परिक लाभ' पर जोर: चीन का कहना है कि उसकी विदेश नीति का मूल सिद्धांत 'पारस्परिक लाभ और साझा विकास' है। वह खुद को वैश्विक दक्षिण का विश्वसनीय साझेदार मानता है और अपने विकास से दूसरे देशों को लाभ पहुंचाना चाहता है।

  • वैश्विक दक्षिण का समर्थन: चीन का दावा है कि उसकी नीतियों से कई अफ्रीकी, एशियाई और लैटिन अमेरिकी देशों को ठोस लाभ हुआ है। उदाहरण के लिए, चीन ने अफ्रीका में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पूरी की हैं, जिससे वहां आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।

  • भविष्य की प्रतिबद्धता: चीन ने कहा है कि वह आगे भी वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग जारी रखेगा और उनके विकास में योगदान देगा। यह चीन की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है।

  • गहन विश्लेषण

    चीन का यह बयान सिर्फ एक राजनयिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह उसकी वैश्विक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। यह अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव को संतुलित करने की चीन की कोशिश का हिस्सा है। चीन 'विकासशील देशों का नेता' बनने की छवि बनाना चाहता है, और इसके लिए वह आर्थिक सहायता, निवेश और व्यापार के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

    हालांकि, आलोचकों का कहना है कि चीन की नीतियां कभी-कभी कर्ज के जाल जैसी समस्याएं पैदा करती हैं। लेकिन चीन इन आरोपों को खारिज करता है और दावा करता है कि उसकी परियोजनाएं पारदर्शी और पारस्परिक लाभ पर आधारित हैं। यह बहस जारी रहने की संभावना है, लेकिन चीन का रुख स्पष्ट है कि वह विकासशील देशों के साथ खड़ा है।

    भविष्य में, चीन की यह रणनीति उसे वैश्विक मंच पर और मजबूत स्थिति दिला सकती है, खासकर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में। वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ चीन की बढ़ती साझेदारी से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया ध्रुवीकरण देखने को मिल सकता है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    चीन पर 'सीढ़ी खींचने' का आरोप क्यों लगाया जाता है?

    यह आरोप अक्सर पश्चिमी मीडिया और कुछ विश्लेषकों द्वारा लगाया जाता है, जो मानते हैं कि चीन अपने विकास के लिए दूसरे विकासशील देशों के संसाधनों और बाजारों का फायदा उठाता है। हालांकि, चीन इन आरोपों को निराधार बताता है और कहता है कि उसकी नीतियां साझा विकास पर केंद्रित हैं।

    चीन की 'सीढ़ी' बनाने की नीति से किन देशों को फायदा हुआ है?

    चीन का दावा है कि बेल्ट एंड रोड पहल से पाकिस्तान, श्रीलंका, केन्या, इथियोपिया जैसे कई देशों को बुनियादी ढांचे और व्यापार में लाभ मिला है। इन देशों में चीन ने बंदरगाह, रेलवे और राजमार्ग जैसी परियोजनाएं बनाई हैं।

    क्या चीन वाकई विकासशील देशों की मदद कर रहा है?

    चीन के समर्थकों का कहना है कि चीन ने कई देशों को कम ब्याज पर ऋण दिया है और बुनियादी ढांचा विकसित करने में मदद की है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि चीन की शर्तें कभी-कभी कठोर होती हैं और कर्ज के बोझ को बढ़ा सकती हैं। फिर भी, कई विकासशील देश चीन को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानते हैं।

    स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34037417

    स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34037417

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    #चीन#विदेश नीति#वैश्विक दक्षिण#बेल्ट एंड रोड#विकास सहयोग#सीढ़ी खींचना

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