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फिलीपींस के रक्षा मंत्री का चीन पर आरोप, बीजिंग ने दिया करारा जवाब

दक्षिण चीन सागर विवाद पर फिलीपींस के रक्षा मंत्री द्वारा चीन पर 'बदमाशी' का आरोप लगाने के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फिलीपींस ने समुद्री कानून का दुरुपयोग किया है। जानें पूरा मामला और चीन का रुख।

दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन और फिलीपींस के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दरअसल, फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो टेओडोरो ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन की ओर से दिए गए एक नोट को 'धमकी' और 'बदमाशी' करार दे दिया। इस पर चीन की ओर से सख्त प्रतिक्रिया आई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण चीन सागर में दोनों देशों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

मामला क्या है?

  • 9 सितंबर को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर जवाब दिया।
  • फिलीपींस के रक्षा मंत्री टेओडोरो ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर दावा किया कि उन्हें एक नोट मिला, जिसमें चीन ने दक्षिण चीन सागर में अपना रुख दोहराया है।
  • उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून कन्वेंशन (UNCLOS) का उल्लंघन बताते हुए चीन पर 'जबरदस्ती, बदमाशी और आक्रामकता' का आरोप लगाया।
  • चीनी प्रवक्ता ने कहा कि फिलीपींस ने अकेले दक्षिण चीन सागर विवाद को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में ले जाकर UNCLOS की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है।
  • चीन ने साफ किया कि वह इस तरह के 'दिखावटी' बयानों से प्रभावित नहीं होगा और फिलीपींस को सलाह दी कि वह 'शोर मचाना' बंद करे।
  • यह घटना उस समय हुई है जब दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच कई बार टकराव हो चुके हैं, खासकर दूसरे थॉमस शोआल पर।

गहराई से समझें

यह घटना सिर्फ एक राजनयिक नोट का मामला नहीं है, बल्कि दक्षिण चीन सागर में बढ़ते महाशक्ति संघर्ष का प्रतीक है। फिलीपींस सरकार ने हाल के वर्षों में अमेरिका के साथ अपने सैन्य संबंधों को मजबूत किया है, जिससे चीन को खतरा महसूस हो रहा है। चीन का कहना है कि वह दक्षिण चीन सागर में अपनी संप्रभुता की रक्षा कर रहा है, जबकि फिलीपींस और अन्य देश इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानते हैं।

चीन ने 2016 के 'दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता' फैसले को कभी स्वीकार नहीं किया, जिसमें फिलीपींस को समर्थन मिला था। चीन का तर्क है कि यह फैसला अवैध है और उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन करता है। इस बार भी चीन ने वही रुख दोहराया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलीपींस के रक्षा मंत्री का यह बयान अमेरिका और उसके सहयोगियों को संकेत देने के लिए हो सकता है कि फिलीपींस चीन के सामने झुकेगा नहीं। लेकिन चीन का रुख भी साफ है — वह अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत की गुंजाइश कम दिखती है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हैं। हालांकि, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि दोनों देश आपसी सहमति से बातचीत का रास्ता निकालें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या चीन ने फिलीपींस को धमकी दी है?

चीन ने किसी भी तरह की धमकी से इनकार किया है। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि फिलीपींस ने UNCLOS का गलत इस्तेमाल किया है और चीन का रुख स्पष्ट और सुसंगत है। चीन ने फिलीपींस को 'शोर मचाना बंद करने' की सलाह दी है।

दक्षिण चीन सागर विवाद का समाधान कैसे संभव है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका समाधान केवल आपसी बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के बजाय सीधी बातचीत से ही दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ेगा।

क्या अमेरिका इस विवाद में हस्तक्षेप कर सकता है?

अमेरिका ने फिलीपींस के साथ सैन्य समझौते किए हैं, लेकिन वह सीधे तौर पर इस विवाद में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। हालांकि, उसकी मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34037418

स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34037418

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