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BRICS शिखर सम्मेलन में चीन का प्रतिनिधित्व: विदेश मंत्रालय का रुख

भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में चीन की ओर से कौन भाग लेगा? विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने क्या कहा? जानें चीन की उम्मीदें और BRICS के भविष्य पर विश्लेषण।

स्रोत: thepaper.cn

भारत इस सप्ताहांत BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, और दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चीन किस स्तर पर इस बैठक में भाग लेगा। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 8 सितंबर को नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि चीन BRICS सहयोग को महत्व देता है और भारत द्वारा सफल शिखर सम्मेलन आयोजित करने का समर्थन करता है, लेकिन उन्होंने विशिष्ट प्रतिनिधि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। यह संयमित प्रतिक्रिया कूटनीतिक सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों के लिए कई संकेत लेकर आई है।

मुख्य बिंदु

  • चीन का समर्थन: माओ निंग ने स्पष्ट किया कि चीन भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस शिखर सम्मेलन का समर्थन करता है, जो द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक संकेत है।
  • प्रतिनिधि की घोषणा नहीं: हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि चीन की ओर से कौन सा वरिष्ठ नेता या मंत्री भाग लेंगे, जिससे कई अटकलें लगाई जा रही हैं।
  • BRICS का महत्व: चीन BRICS को बहुपक्षीय मंच के रूप में देखता है, जो वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज़ को मजबूत करता है।
  • भारत-चीन संबंध: यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश सीमा विवाद और व्यापारिक मुद्दों को सुलझाने के प्रयास कर रहे हैं।
  • उम्मीदें: चीन उम्मीद करता है कि यह बैठक सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए नई दिशा तय करेगी।
  • अन्य सदस्य देश: रूस, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और नए शामिल हुए देशों की भूमिका भी इस बैठक में अहम होगी।
  • वैश्विक प्रभाव: BRICS का विस्तार और उसका बढ़ता प्रभाव पश्चिमी देशों के वर्चस्व वाले वैश्विक मंचों को चुनौती दे रहा है।

गहन विश्लेषण

चीन का यह संयमित रुख कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहली बात, यह दर्शाता है कि चीन और भारत के बीच संबंधों में सुधार की गुंजाइश है, लेकिन अभी भी कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बनी है। दूसरी बात, यह BRICS के भीतर चीन की भूमिका को रेखांकित करता है – वह एक प्रमुख सदस्य है, लेकिन वह अपनी स्थिति को लेकर सतर्क है। यह भी संभव है कि चीन अपने प्रतिनिधि की घोषणा बाद में करे, जब माहौल और स्पष्ट हो। BRICS का विस्तार हाल के वर्षों में हुआ है, जिसमें ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हुए हैं, जिससे इस मंच की वैश्विक पहुंच बढ़ी है। चीन इस मंच का उपयोग अमेरिका के नेतृत्व वाले आदेश को चुनौती देने और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए करता है। हालांकि, चीन की ओर से प्रतिनिधि के स्तर को लेकर अनिश्चितता यह संकेत दे सकती है कि वह कुछ मुद्दों पर भारत के साथ तालमेल बिठाने से बचना चाहता है। आगे देखते हुए, BRICS का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश किस हद तक आपसी मतभेदों को दरकिनार कर साझा लक्ष्यों पर काम करते हैं। चीन के लिए, यह शिखर सम्मेलन अपनी वैश्विक छवि को मजबूत करने और विकासशील देशों के बीच अपनी स्थिति को पुख्ता करने का एक अवसर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या चीन के प्रतिनिधि के बारे में जानकारी न देना भारत के लिए अपमान है?

ज़रूरी नहीं। कूटनीति में अक्सर ऐसा होता है कि विशिष्ट जानकारी बाद में साझा की जाती है। चीन ने भारत की मेजबानी का समर्थन व्यक्त किया है, जो सकारात्मक संकेत है।

इस शिखर सम्मेलन से भारत को क्या लाभ हो सकता है?

भारत के लिए यह एक मौका है कि वह वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को मजबूत करे और चीन जैसे देशों के साथ व्यापारिक और रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत करे। साथ ही, यह भारत को वैश्विक दक्षिण का नेता बनने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।

BRICS का विस्तार चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

विस्तार से BRICS का आर्थिक और राजनीतिक भार बढ़ता है, जिससे चीन को अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी गठबंधन के मुकाबले एक मजबूत विकल्प मिलता है। यह चीन को वैश्विक शासन में सुधार की वकालत करने का मंच भी देता है।

स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34029265

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#BRICS#चीन#भारत#विदेश नीति#शिखर सम्मेलन#कूटनीति

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