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ट्रम्प प्रशासन की नई दवा मूल्य सौदेबाजी: 9 कंपनियों के साथ समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 9 दवा निर्माताओं के साथ नए मूल्य समझौते किए, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें विदेशों के बराबर होंगी। जानें इसका असर और बाजार पर प्रभाव।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को घोषणा की कि उनके प्रशासन ने नौ दवा निर्माता कंपनियों के साथ नए मूल्य समझौते किए हैं, जिसके तहत ये कंपनियां अपनी दवाओं को कम कीमत पर बेचने के लिए सहमत हुई हैं। यह कदम अमेरिका में दवाओं की कीमतों को विदेशों की तुलना में सस्ता करने की दिशा में एक और प्रयास है। इसका उद्देश्य अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत देना और स्वास्थ्य सेवा को अधिक किफायती बनाना है। यह समझौते मध्यावधि चुनावों से पहले स्वास्थ्य सेवा की सामर्थ्य को लेकर प्रशासन के प्रयासों को मजबूत करते हैं।

दवा मूल्य समझौते

मुख्य बिंदु

  • नई सौदेबाजी में शामिल कंपनियां: व्हाइट हाउस के अनुसार, जिन नौ कंपनियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें अल्कॉन, एस्टेलस फार्मा, बीवन मेडिसिन्स, ब्रिजबायो, सीएसएल, क्योवा किरिन, सन फार्मा, टेवा फार्मास्युटिकल्स और यूसीबी शामिल हैं। इनमें से कई कंपनियों के शेयर सोमवार को लगभग स्थिर रहे, जबकि टेवा और बीवन में लगभग 1% की गिरावट आई।

  • समझौते का दायरा: इन समझौतों के तहत, कंपनियों ने हर राज्य के मेडिकेड कार्यक्रमों को आउटपेशेंट दवाओं पर छूट देने पर सहमति व्यक्त की है, ताकि राज्यों द्वारा भुगतान की जाने वाली कीमतें विदेशों में कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्क के अनुरूप हों। यह समझौते हीमोफीलिया, यकृत रोग, त्वचा की स्थिति और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी पुरानी और दुर्लभ बीमारियों के इलाज करने वाली दवाओं को प्रभावित करते हैं।

  • अमेरिकी विनिर्माण में निवेश: व्हाइट हाउस के अनुसार, इन कंपनियों ने निकट भविष्य में सामूहिक रूप से अमेरिकी विनिर्माण में कम से कम 19.6 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह कदम दवा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

  • सक्रिय दवा सामग्री का दान: एस्टेलस, सन फार्मा, टेवा और यूसीबी ने प्रमुख उत्पादों के लिए सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) को संघीय सरकार के रणनीतिक भंडार को दान करने पर सहमति व्यक्त की है। उदाहरण के लिए, यूसीबी 163 टन लेवेटिरासेटम दान करेगा, जो एक एंटीकॉन्वल्सेंट है जिसका उपयोग दौरे को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

  • कुल समझौतों की संख्या: इन नए समझौतों के साथ, ट्रम्प प्रशासन के पास अब कुल 26 कंपनियों के साथ दवा मूल्य समझौते हो गए हैं, जो राष्ट्रपति के अनुसार घरेलू फार्मास्युटिकल बाजार का 90% प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि शेष 10% उद्योग भी "आ रहा है" और उनके पास "कोई विकल्प नहीं है"।

  • पिछले समझौते: पिछले वर्ष, ट्रम्प प्रशासन ने अपनी "मोस्ट फेवर्ड नेशन" नीति के हिस्से के रूप में फाइजर, एली लिली और नोवो नॉर्डिस्क सहित 17 अन्य फार्मास्युटिकल कंपनियों के साथ दवा मूल्य समझौते किए थे। ट्रम्प ने मई 2025 में इस नीति को पुनर्जीवित करने के लिए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें अमेरिका के बाहर कीमतें बढ़ाने और "वैश्विक मुफ्तखोरी समाप्त करने" का आह्वान किया गया था।

  • कंपनियों पर प्रभाव: इन समझौतों का फार्मास्युटिकल कंपनियों की व्यावसायिक रणनीतियों, मुनाफे और विनिर्माण पाइपलाइनों पर पहले से ही प्रभाव पड़ा है। भविष्य के टैरिफ खतरों से बचने के लिए, दवा निर्माता विनिर्माण क्षमताओं को अमेरिका वापस लाने पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं। साथ ही, कंपनियां अपने उत्पादों के लिए डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर चैनलों का विस्तार कर रही हैं, जिसमें राष्ट्रपति के ट्रम्पआरएक्स पोर्टल पर अपनी दवाएं पेश करना शामिल है।

  • कीमतों में अंतर: अमेरिका में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतें विदेशों की तुलना में औसतन लगभग तीन गुना अधिक हैं, जबकि ब्रांडेड दवाओं की कीमतें चार गुना से अधिक हैं, जैसा कि 2024 के रैंड कॉर्पोरेशन के अध्ययन में पाया गया।

  • गहन विश्लेषण

    यह कदम अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। ट्रम्प प्रशासन दवा की कीमतों को विदेशी स्तरों से जोड़कर एक नई मिसाल कायम कर रहा है, जिससे दवा कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, यह नीति अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन दवा निर्माताओं के लिए चुनौतीपूर्ण है। कंपनियां पहले से ही कम कीमतों के कारण राजस्व में गिरावट का सामना कर रही हैं, जैसा कि नोवो नॉर्डिस्क ने कहा है कि प्रिस्क्रिप्शन वॉल्यूम को राजस्व में गिरावट की भरपाई करने में समय लगेगा।

    इसके अलावा, यह नीति अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। दवा कंपनियों द्वारा अमेरिका में निवेश करने से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और विदेशी निर्भरता कम होगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, फार्मास्युटिकल उद्योग के व्यापार संगठन PhRMA ने पहले कहा है कि मोस्ट फेवर्ड नेशन मूल्य निर्धारण अमेरिकियों के लिए दवा लागत कम करने का सबसे अच्छा तरीका नहीं है, और इसके बजाय फार्मेसी बेनिफिट मैनेजरों को दोषी ठहराया है।

    आगे देखते हुए, यह नीति मध्यावधि चुनावों से पहले प्रशासन के लिए एक राजनीतिक लाभ के रूप में काम कर सकती है, क्योंकि स्वास्थ्य सेवा की सामर्थ्य एक प्रमुख मुद्दा है। हालांकि, दवा कंपनियों के लिए, यह एक नई वास्तविकता है जिसे उन्हें अपनाना होगा, और वे अपनी रणनीतियों को तदनुसार समायोजित कर रहे हैं। अमेरिका कई दवा निर्माताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है, और यूरोपीय कंपनियां भी अमेरिकी बाजार पर भारी निर्भर हैं, जहां शीर्ष 10 में से आधी कंपनियों की बिक्री का बहुमत अमेरिका से आता है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    प्रश्न: क्या ये समझौते अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए दवाओं की कीमतों में तुरंत कमी लाएंगे?

    उत्तर: हां, इन समझौतों का उद्देश्य मेडिकेड कार्यक्रमों के माध्यम से आउटपेशेंट दवाओं की कीमतों को कम करना है, जिससे राज्यों को कम कीमत पर दवाएं मिलेंगी। हालांकि, इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है, क्योंकि यह मुख्य रूप से मेडिकेड लाभार्थियों को लक्षित करता है।

    प्रश्न: क्या यह नीति भारतीय दवा कंपनियों को प्रभावित करेगी?

    उत्तर: सन फार्मा जैसी भारतीय दवा कंपनियां इस समझौते में शामिल हैं, जिससे उन्हें अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए कीमतों में कटौती करनी पड़ सकती है। यह उनके मुनाफे पर दबाव डाल सकता है, लेकिन अमेरिकी बाजार में उनकी पहुंच बनी रहेगी।

    प्रश्न: क्या अन्य देशों में भी इसी तरह की नीति अपनाई जा सकती है?

    स्रोत URL: https://www.cnbc.com/2026/08/31/trump-drug-pricing-deals.html

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    #दवा मूल्य#ट्रम्प#फार्मास्युटिकल#अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा#मोस्ट फेवर्ड नेशन#दवा कंपनियां

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