MyApp Analyze
भाषा:|MyCapital ↗
news·AI क्यूरेशन

अमेरिका में बदलता ब्यूटी ट्रेंड: 'पोस्ट-कार्देशियन' युग में फिलर्स की घटती लोकप्रियता

अमेरिकी महिलाओं में अब नेचुरल लुक का चलन, फिलर्स की खपत घटी, 33 अरब डॉलर का बाजार प्रभावित। जानें कारण, बदलते ट्रेंड और भविष्य की संभावनाएं।

अमेरिकी ब्यूटी इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ सालों में जहां 'फिलर्स' यानी चेहरे पर इंजेक्शन से भरावन लाने का चलन जोरों पर था, वहीं अब महिलाएं नेचुरल और कम प्रभाव वाले लुक को तरजीह दे रही हैं। यह बदलाव सिर्फ फैशन का नहीं, बल्कि 33 अरब डॉलर के अमेरिकी मेडिकल ब्यूटी बाजार को गहराई से प्रभावित कर रहा है। आइए समझते हैं इस 'पोस्ट-कार्देशियन' युग में बदलते सौंदर्य मानकों और इसके पीछे की वजहों को।

मुख्य बातें

  • फिलर्स की खपत में गिरावट: मेडिकल डेटा फर्म Guidepoint Qsight के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच अमेरिका में हयालूरोनिक एसिड फिलर्स के उपचारों में 18% की कमी आई है। वहीं, क्वार्टरली खर्च 2023 में 9.7 अरब डॉलर से घटकर 2025 में 8.5 अरब डॉलर रह गया है।
  • कंपनियों पर असर: एबवी (AbbVie) का लोकप्रिय ब्रांड जुवेडर्म (Juvederm) 2025 में वैश्विक स्तर पर 15% की गिरावट दर्ज की, और यह अब 1 अरब डॉलर से अधिक की सालाना बिक्री वाला उत्पाद नहीं रहा।
  • बदलती प्राथमिकताएं: ग्राहक अब फिलर्स के साइड इफेक्ट्स जैसे मूवमेंट (शिफ्टिंग), लंबे समय तक रहने और 'ओवरडन' लुक से चिंतित हैं। वे कम मात्रा में इंजेक्शन, कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट, फैट ट्रांसफर और सर्जरी जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • नेचुरल लुक की मांग: बेवर्ली हिल्स के एक प्लास्टिक सर्जन के मुताबिक, उनके पास फिलर्स की अपॉइंटमेंट्स में पिछले तीन सालों से लगातार गिरावट आई है, 2026 में यह 2023 की तुलना में 70% कम है। इसके बजाय, मरीज फैट ग्राफ्टिंग या अपने खून से बने प्लाज्मा ट्रीटमेंट जैसे नेचुरल विकल्प चुन रहे हैं।
  • सर्जरी की ओर रुझान: 2026 की पहली छमाही में फेशियल सर्जरी (जैसे नाक और फेसलिफ्ट) पर खर्च 1.8 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 22% अधिक है। लोग अब लंबे समय तक चलने वाले और अधिक प्रभावी समाधान चाहते हैं।
  • कीमतों में अंतर: एक फिलर इंजेक्शन की कीमत लगभग 1,000 डॉलर होती है, जबकि फैट ग्राफ्टिंग जैसी नेचुरल ट्रीटमेंट की कीमत 10,000 डॉलर तक पहुंच सकती है। फिर भी लोग प्रीमियम देने को तैयार हैं।

गहन विश्लेषण

यह बदलाव सिर्फ एक फैशन ट्रेंड नहीं है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक बदलावों का परिणाम है। पिछले दशक में किम कार्देशियन जैसी हस्तियों के प्रभाव में 'फिल्ड' लुक (भरे हुए होंठ, ऊंचे चीकबोन्स) को खूब पसंद किया गया। लेकिन अब महिलाएं अपने चेहरे पर 'काम करवाने' के कलंक से बचना चाहती हैं। सोशल मीडिया पर फिलर्स के साइड इफेक्ट्स (जैसे फिलर का शिफ्ट होना, आंखों के नीचे सूजन, और घुलने की दर्दनाक प्रक्रिया) की कहानियां वायरल हो रही हैं, जिससे डर बढ़ा है। हालांकि, इनमें कई बार अतिशयोक्ति भी होती है, फिर भी यह चिंता जायज है।

इसके अलावा, अमेरिका में GLP-1 दवाओं (जैसे ओज़ेम्पिक) के कारण वजन घटाने का चलन बढ़ा है, जिससे पतलेपन की ओर रुझान लौटा है। इसके साथ ही, ब्रेस्ट इम्प्लांट्स को छोटा करने और ब्राज़ीलियन बट लिफ्ट (BBL) को रिवर्स करने जैसे ट्रेंड भी उभर रहे हैं। इन सबका नतीजा यह है कि अत्यधिक भरा हुआ चेहरा अब 'आउट' है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वजन घटाने से चेहरे पर झुर्रियां और धंसाव आ सकता है, जो फिर से नई मेडिकल ब्यूटी डिमांड पैदा कर सकता है।

बाजार पर नजर डालें तो, फिलर्स पूरी तरह से खत्म नहीं हुए हैं। कंपनियां अब अपनी रणनीति बदल रही हैं। वे 'फिलर' शब्द की जगह 'हयालूरोनिक एसिड जेल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि नेगेटिव इमेज से बचा जा सके। साथ ही, वे नेचुरल रिजल्ट्स पर जोर देने वाले विज्ञापन और डॉक्टरों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम में निवेश कर रही हैं। कुछ डॉक्टर 'कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट' की सलाह देते हैं, जिसमें कम फिलर के साथ कोलेजन-स्टिम्युलेटिंग इंजेक्शन (जैसे स्कल्प्ट्रा) और प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा (PRP) थेरेपी शामिल होती है। यह ट्रेंड आने वाले समय में और बढ़ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या फिलर्स पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे? फिलर्स का बाजार घट रहा है, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं होगा। फिलर्स अभी भी कई मामलों में प्रभावी हैं, खासकर हल्के से मध्यम झुर्रियों के लिए। लेकिन अब इनका इस्तेमाल अधिक सोच-समझकर और कम मात्रा में किया जा रहा है।

क्या नेचुरल ट्रीटमेंट सुरक्षित हैं? फैट ग्राफ्टिंग और PRP थेरेपी जैसे विकल्प आमतौर पर सुरक्षित माने जाते हैं, क्योंकि ये शरीर के अपने ऊतकों का उपयोग करते हैं। हालांकि, किसी भी मेडिकल प्रक्रिया के जोखिम होते हैं, इसलिए अनुभवी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

क्या भारत में भी यह ट्रेंड है? भारत में भी अब नेचुरल लुक की मांग बढ़ रही है, खासकर मेट्रो शहरों में। युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के प्रभाव में है, लेकिन वे 'ओवरडन' लुक से बचना चाहते हैं। भारतीय बाजार में भी फिलर्स की बिक्री प्रभावित हुई है, हालांकि यहां की स्थिति अमेरिका से थोड़ी अलग है।

स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_33981730

स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_33981730

टैग

#ब्यूटी ट्रेंड#फिलर्स#नेचुरल लुक#अमेरिका#मेडिकल ब्यूटी#पोस्ट-कार्देशियन

संबंधित लेख

ट्रम्प प्रशासन की नई दवा मूल्य सौदेबाजी: 9 कंपनियों के साथ समझौता
news

ट्रम्प प्रशासन की नई दवा मूल्य सौदेबाजी: 9 कंपनियों के साथ समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 9 दवा निर्माताओं के साथ नए मूल्य समझौते किए, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें विदेशों के बराबर होंगी। जानें इसका असर और बाजार पर प्रभाव।

#दवा मूल्य#ट्रम्प#फार्मास्युटिकल
news

स्मारक सिक्का घोटाला: बुजुर्गों को निशाना बनाने वाला धोखाधड़ी का खेल

जानिए कैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 'सीमित संस्करण' और 'कीमती धातु' के दावों से बुजुर्गों को स्मारक सिक्कों के नाम पर ठगा जा रहा है। सच्चाई, कानूनी पहलू और बचाव के उपाय।

#स्मारक सिक्का घोटाला#बुजुर्ग धोखाधड़ी#ऑनलाइन ठगी
चीन का PMI अगस्त में 49.8% पर पहुंचा, आर्थिक सुधार के संकेत
news

चीन का PMI अगस्त में 49.8% पर पहुंचा, आर्थिक सुधार के संकेत

अगस्त 2026 में चीन का विनिर्माण PMI बढ़कर 49.8% हो गया, जो आर्थिक सुधार का संकेत है। जानें कि किन क्षेत्रों में तेजी आई और आगे क्या उम्मीदें हैं।

#चीन-पीएमआई#विनिर्माण-क्षेत्र#आर्थिक-सुधार