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चीन में खपत बढ़ाने की नीति: काई फांग का विश्लेषण और सुझाव

चीनी अर्थशास्त्री काई फांग ने खपत बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक नीतियों पर जोर दिया। जानें कैसे आय वितरण, सामाजिक सुरक्षा और AI नीतियां चीन की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं।

स्रोत: 163.com

चीन की अर्थव्यवस्था इन दिनों एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। जहां एक ओर सरकार आर्थिक विकास को गति देने के लिए कई कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू खपत को बढ़ाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हाल ही में शेन्ज़ेन में आयोजित 2026 नेटईज़ इकोनॉमिस्ट्स एनुअल समर फोरम में, चीनी एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के प्रतिष्ठित विद्वान काई फांग ने इस विषय पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। उनका मानना है कि खपत बढ़ाने के लिए केवल अल्पकालिक उपाय ही नहीं, बल्कि एक समग्र और दीर्घकालिक नीति ढांचे की आवश्यकता है। यह लेख उनके विचारों को विस्तार से समझने का प्रयास करता है, साथ ही भारतीय पाठकों के लिए प्रासंगिक संदर्भ भी प्रदान करता है।

मुख्य बिंदु

  • अल्पकालिक उपाय सीमित हैं: काई फांग ने स्पष्ट किया कि 'होम अप्लायंस सब्सिडी', 'कार सब्सिडी', और 'पुराने उपकरणों के बदले नए' जैसी योजनाएं प्रभावी हैं, लेकिन ये मुख्य रूप से चक्रीय (साइक्लिकल) नीतियां हैं। इनका असर अस्थायी होता है और ये दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं।

  • उपभोग दर (कंजम्पशन रेट) का महत्व: उन्होंने बताया कि जहां जीडीपी में उपभोग का योगदान अल्पकालिक उतार-चढ़ाव दिखाता है, वहीं उपभोग दर (उपभोग व्यय/जीडीपी) लंबे समय में स्थिर रहती है। यह दर आय वितरण और श्रम आय के अनुपात से जुड़ी है।

  • आय वितरण और सामाजिक सुरक्षा: खपत बढ़ाने के लिए आय वितरण नीतियों में सुधार और सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करना आवश्यक है। काई फांग ने कहा कि केवल कराधान ही नहीं, बल्कि बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।

  • जनसांख्यिकीय चुनौतियाँ: चीन में 'अमीर होने से पहले बूढ़ा होना' (गेटिंग ओल्ड बिफोर गेटिंग रिच) की स्थिति है। इसके अलावा, श्रम बाजार में युवाओं और वृद्ध श्रमिकों के बीच बेरोजगारी की दर अधिक है, जो खपत को प्रभावित करती है।

  • शहरी-ग्रामीण असमानता: शहरी और ग्रामीण उपभोग में बड़ा अंतर है। शहरी निवासियों का कुल उपभोग ग्रामीणों की तुलना में चार गुना अधिक है, जबकि प्रति व्यक्ति खपत में यह अंतर केवल दो गुना है। इसका मतलब है कि शहरी आबादी की आय वृद्धि धीमी हो रही है।

  • माइग्रेंट वर्कर्स का योगदान: काई फांग ने बताया कि यदि माइग्रेंट वर्कर्स (जो शहरों में काम करते हैं लेकिन उनके पास शहरी नागरिकता नहीं है) को समान सार्वजनिक सेवाएं दी जाएं, तो उनकी खपत 30% तक बढ़ सकती है। इससे देश की कुल खपत में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हो सकती है।

  • 'पे-एज़-यू-गो' विरोधाभास: वर्तमान कार्यशील आबादी पर तिहरा दबाव है - पेंशन योगदान, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, और भविष्य के लिए बचत। इससे लोगों की खर्च करने की क्षमता सीमित हो जाती है। इसका समाधान सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना है।

  • AI और श्रम बाजार: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आगमन ने युवाओं के लिए प्रवेश स्तर के कौशल को कम मूल्यवान बना दिया है, जबकि वृद्ध श्रमिकों के लिए डिजिटल विभाजन बढ़ गया है। इसके लिए 'अपग्रेडेड' सक्रिय रोजगार नीतियों की आवश्यकता है।

गहन विश्लेषण

काई फांग का विश्लेषण केवल चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खपत को बढ़ावा देने के लिए केवल अल्पकालिक प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं हैं; बल्कि संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। चीन का लक्ष्य 2035 तक प्रति व्यक्ति जीडीपी को 2020 के स्तर से दोगुना करके लगभग 22,000 डॉलर तक पहुंचाना है, जो इसे एक उच्च-मध्यम आय वाले देश की श्रेणी में लाएगा। इसके लिए उसे लगभग 20 देशों को पीछे छोड़ना होगा। इस संदर्भ में, उपभोग दर को बढ़ाना न केवल एक आर्थिक आवश्यकता है, बल्कि एक सामाजिक लक्ष्य भी है।

विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए, काई फांग बताते हैं कि जब कोई देश निम्न आय से मध्यम-उच्च आय की ओर बढ़ता है, तो उपभोग दर घटती है, लेकिन जब वह उच्च आय की ओर कदम बढ़ाता है, तो उपभोग दर फिर से बढ़ने लगती है। चीन इस संक्रमण के कगार पर है, इसलिए उपभोग दर में वृद्धि स्वाभाविक है, लेकिन इसे नीतिगत हस्तक्षेप से तेज किया जा सकता है।

भारत के संदर्भ में, यह विश्लेषण बेहद प्रासंगिक है। भारत में भी घरेलू खपत जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन आय असमानता और सामाजिक सुरक्षा की कमी के कारण खपत की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता। काई फांग द्वारा सुझाए गए उपाय - जैसे कि सार्वजनिक सेवाओं में निवेश, शिक्षा और कौशल विकास, और सामाजिक सुरक्षा जाल - भारत के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। वास्तव में, भारत में 'आधार' जैसी डिजिटल पहचान प्रणाली ने सब्सिडी और सेवाओं के वितरण को सुगम बनाया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

एक और महत्वपूर्ण पहलू AI का प्रभाव है। चीन और भारत दोनों ही AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन श्रम बाजार पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताएं हैं। काई फांग का सुझाव है कि AI को श्रम के प्रतिस्थापन के बजाय 'संवर्धन' (एन्हांसमेंट) के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका मतलब है कि शिक्षा प्रणाली को इस तरह बदलना होगा कि लोग AI के साथ काम कर सकें, न कि उससे प्रतिस्पर्धा करें। यह विचार भारत के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है, जहां युवा आबादी को कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

अंत में, काई फांग का यह कथन कि 'भौतिक निवेश से अधिक मानव निवेश' पर ध्यान देना चाहिए, एक क्रांतिकारी विचार है। चीन और भारत दोनों ने बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया है, लेकिन अब समय आ गया है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जाए। यह न केवल खपत को बढ़ावा देगा, बल्कि दीर्घकालिक विकास की नींव भी मजबूत करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: काई फांग के अनुसार, चीन में खपत बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम क्या है?

उत्तर: काई फांग के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण कदम है 'मानव में निवेश' (इन्वेस्टमेंट इन पीपल) को बढ़ाना। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, और कौशल विकास शामिल हैं। इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और आय वितरण में सुधार करना भी आवश्यक है।

प्रश्न 2: 'पे-एज़-यू-गो' विरोधाभास क्या है और यह खपत को कैसे प्रभावित करता है?

उत्तर: 'पे-एज़-यू-गो' विरोधाभास का मतलब है कि वर्तमान कार्यशील आबादी को पेंशन योगदान, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, और भविष्य के लिए बचत करने के कारण अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा खर्च नहीं कर पाती है। इससे खपत कम हो जाती है। इसका समाधान सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना है, ताकि लोग भविष्य की चिंता किए बिना खर्च कर सकें।

प्रश्न 3: क्या ये नीतियां भारत के लिए भी उपयोगी हैं?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। भारत में भी आय असमानता, सामाजिक सुरक्षा की कमी, और शहरी-ग्रामीण अंतर जैसी समस्याएं हैं। काई फांग द्वारा सुझाए गए उपाय - जैसे कि सार्वजनिक सेवाओं में निवेश, शिक्षा और कौशल विकास, और सामाजिक सुरक्षा जाल - भारत के लिए भी प्रासंगिक हैं। भारत सरकार पहले से ही कई योजनाओं पर काम कर रही है, लेकिन इन्हें और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

चीन में खपत बढ़ाने की नीति पर चर्चा

स्रोत URL: https://www.163.com/money/article/L4SBHOP800259S57.html

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