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फेड अध्यक्ष वॉश के बयान से सुनामी: सोना-बिटकॉइन को झटका, 96,000 से अधिक ट्रेडर्स लिक्विडेट

फेड अध्यक्ष वॉश के सख्त रुख से सोना, चांदी और क्रिप्टो बाजार में भारी गिरावट। 9.6 लाख से अधिक ट्रेडर्स की लिक्विडेशन, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से बाजार हिला। जानिए पूरा विश्लेषण।

वैश्विक वित्तीय बाजारों में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश के 'हॉकिश' (सख्त) रुख के बाद सोना, चांदी और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। 29 अगस्त की सुबह, सोने की कीमत 3% से अधिक टूटकर 4,453 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि बिटकॉइन सहित प्रमुख क्रिप्टो मुद्राओं में 4% तक की गिरावट आई। CoinGlass के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 96,839 ट्रेडर्स लिक्विडेट हुए हैं, जिनकी कुल राशि 474 मिलियन डॉलर है। यह घटना न केवल निवेशकों के लिए चेतावनी है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति को भी उजागर करती है। आइए समझते हैं कि आखिर हुआ क्या और आगे क्या उम्मीद की जा सकती है।

मुख्य बिंदु

  • फेड अध्यक्ष का सख्त बयान: केविन वॉश ने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि मुद्रास्फीति हमारे लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, और यह प्रक्रिया स्पष्ट और पर्याप्त तेज होनी चाहिए।" इस बयान ने बाजार में हलचल मचा दी।

  • बॉन्ड यील्ड में उछाल: वॉश के बयान के बाद अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की बिकवाली तेज हो गई। दो साल के ट्रेजरी यील्ड में 10 बेसिस पॉइंट से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जो 4.356% पर बंद हुई। दस साल की यील्ड भी बढ़कर 4.722% पर पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का सीधा असर सोने और क्रिप्टो जैसी जोखिम भरी संपत्तियों पर पड़ता है।

  • सोने-चांदी में गिरावट: सोने की कीमत 2.95% गिरकर 4,453.67 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि चांदी 4.16% की गिरावट के साथ 66.33 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। दिलचस्प बात यह है कि दिन की शुरुआत में दोनों में तेजी देखी गई थी, लेकिन फेड अध्यक्ष के बयान ने पलट दिया।

  • क्रिप्टो बाजार में लिक्विडेशन: बिटकॉइन और एथेरियम में 3% से अधिक की गिरावट आई, जबकि SOL, HYPE, XRP और डॉगकॉइन में 4% से अधिक की गिरावट रही। 96,000 से अधिक ट्रेडर्स के लिक्विडेट होने से बाजार में दहशत है।

  • शेयर बाजार पर दबाव: अमेरिकी शेयर बाजार भी लाल निशान में बंद हुआ। डाउ जोंस 0.02% की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि S&P 500 में 0.25% और नैस्डैक में 0.52% की गिरावट आई। चिप सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई, फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.47% टूटा।

  • टेक दिग्गजों का मिला-जुला प्रदर्शन: अमेज़न में 4% की तेजी रही, जबकि एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा में 1% से अधिक की बढ़त देखी गई। लेकिन एनवीडिया में 4% से अधिक की गिरावट आई, और मार्वल टेक्नोलॉजी में 10% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

  • मार्वल टेक्नोलॉजी की चिंता: मार्वल टेक्नोलॉजी के शेयरों में भारी गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों को गूगल के साथ AI चिप समझौते से राजस्व की उम्मीद पर संदेह है। कंपनी ने 2027 के राजस्व अनुमान बढ़ाए हैं, लेकिन बाजार को भरोसा नहीं है।

गहन विश्लेषण

यह घटना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। फेड अध्यक्ष वॉश का सख्त रुख 2009 के बाद से सबसे आक्रामक माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, उनके बयान के बाद दो साल के बॉन्ड यील्ड में तत्काल उछाल ने पूर्व फेड अध्यक्ष पॉवेल के 2022 और 2023 के जैक्सन होल भाषणों से भी अधिक प्रभाव दिखाया। इसका मतलब है कि बाजार ने अब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि वॉश ने मुद्रास्फीति पर स्पष्ट रुख तो दिया है, लेकिन किसी विशेष तारीख या समय का जिक्र नहीं किया है। इस अनिश्चितता ने बाजार को और परेशान कर दिया है। अर्थशास्त्री स्टीफन स्टेनली का मानना है कि जब तक आर्थिक आंकड़ों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी लगभग तय है। वहीं, पूर्व फेड उपाध्यक्ष रिचर्ड क्लेरिडा का कहना है कि वॉश ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

इसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। सोने की कीमतों में गिरावट से भारतीय खरीदारों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन क्रिप्टो निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

आगे की राह देखते हुए, बाजार की नजर अब अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी रोजगार डेटा पर होगी। अगर डेटा मजबूत रहा, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना और बढ़ जाएगी, जिससे सोने और क्रिप्टो पर और दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, अगर डेटा कमजोर रहा, तो बाजार में कुछ राहत देखी जा सकती है। फिलहाल, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दें और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्या सोने में निवेश करना अब सुरक्षित है?

सोने को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ब्याज दरों में बढ़ोतरी के माहौल में इसकी चमक फीकी पड़ सकती है। अगर फेड दरें बढ़ाता है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बना रहेगा। हालांकि, लंबी अवधि में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते सोना अभी भी एक अच्छा निवेश विकल्प हो सकता है। निवेशकों को अपने निवेश क्षितिज के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

प्रश्न: क्रिप्टो बाजार में गिरावट का कारण क्या है?

क्रिप्टो बाजार में गिरावट का मुख्य कारण फेड अध्यक्ष के सख्त बयान और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका है। ब्याज दरें बढ़ने पर जोखिम भरी संपत्तियों जैसे क्रिप्टो से निवेशक दूर हो जाते हैं। साथ ही, बिटकॉइन की कीमत में उतार-चढ़ाव के कारण लिक्विडेशन की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

प्रश्न: क्या भारतीय बाजार पर इसका असर पड़ेगा?

हां, भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर असर पड़ सकता है। विदेशी निवेशक अमेरिकी बॉन्ड की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे भारतीय बाजार से पैसा निकल सकता है। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रह सकता है।

स्रोत URL: https://www.163.com/dy/article/L5G08G3T0519JFL1.html

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