युनाइटेड नेशन्स बायोडायवर्सिटी कॉन्वेंशन: 'एरिवन पाथ' ने बायोडायवर्सिटी सुरक्षा की दिशा फिर से निर्धारित की
यूएन बायोडायवर्सिटी कॉन्वेंशन सीओपी17 में जारी 'एरिवन पाथ' क्या है? यह 'कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दुनिया को कैसे निर्देशित कर रहा है।
स्रोत: thepaper.cn
एरिवन, आर्मेनिया में हुए यूएन बायोडायवर्सिटी कॉन्वेंशन (सीओपी17) की बात है जो बायोडायवर्सिटी सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक है। दो साल पहले कोलंबिया में हुए सीओपी16 की तरह, इस बार भी विवादों ने अंतिम सत्र को लंबा किया। लेकिन इस बार, अंततः एक समझौता हुआ और दुनिया के लगभग 200 देशों ने एक नई दिशा निर्धारित की। यह दिशा 'एरिवन पाथ' (एरिवन पाथ) कहलाती है, जो 2030 तक बायोडायवर्सिटी के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक निर्देशित रास्ता प्रदान करती है। इस बार की सफलता का विश्लेषण और चुनौतियां नीचे दी गई हैं।
मुख्य बिंदु
- एरिवन पाथ क्या है?: यह 'कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक विश्वव्यापी रास्ता है। इसका उद्देश्य उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वर्तमान रुकावटों को दूर करना है।
- 2030 तक की दूरी: वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने के बाद, विश्व स्तर पर लगभग 200 देशों ने अपनी राह फिर से निर्धारित की है। यह यात्रा काफी लंबी है और इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है।
- वित्तीय चुनौतियां: एक बड़ी रुकावट अभी भी वित्तीय सहायता की कमी है। विश्व बैंक और ग्लोबल एनवायर्मेंटल फंड (जीईएफ) जैसे निधियों के पास अभी भी उचित राशि नहीं है जो देशों को आवश्यक सहायता प्रदान कर सके।
- देशों की भूमिका: देशों को अपने अंतर्राष्ट्रीय कर्तव्यों को लेकर अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी। विशेष रूप से, विकसित देशों को अपनी वारंटी के अनुसार वित्तीय सहायता देनी होगी।
- सामाजिक भागीदारी: सफलता के लिए सरकारों के अलावा, समाज की भी भागीदारी आवश्यक है। सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है।
- चीन का योगदान: चीन ने इस बार की सफलता में अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने 'कुनमिंग डायलॉग' का संचालन किया और 'कुनमिंग फंड' की स्थापना की।

गहराई से विश्लेषण
एरिवन में हुए सीओपी17 का मुख्य लक्ष्य 'कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक विश्वव्यापी रास्ता तय करना था। यह रास्ता 'एरिवन पाथ' कहलाता है। यह एक नई फाइल नहीं है, बल्कि वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने और भविष्य के लिए एक योजना तैयार करने का एक हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वर्तमान में हमारे पास जो लक्ष्य हैं, उन्हें पूरा करने के लिए हम क्या कर सकते हैं।
विश्व स्तर पर जारी रहने वाली बायोडायवर्सिटी की समस्याओं को देखते हुए, यह बहुत जरूरी है कि हम अपनी दिशा फिर से निर्धारित करें। इस बार की सफलता का विश्लेषण करने पर, हमें दो मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। एक तो वित्तीय सहायता की कमी है, और दूसरी यह कि विकसित देशों को अपनी वारंटी के अनुसार वित्तीय सहायता देने में असमर्थ हैं। यह एक बड़ी समस्या है जिसे हल करने के लिए दुनिया के देशों को साथ मिलकर काम करना होगा।
इसके अलावा, वित्तीय सहायता के अलावा, सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। सरकारों के अलावा, समाज की भी भागीदारी आवश्यक है। सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है। चीन ने इस बार की सफलता में अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने 'कुनमिंग डायलॉग' का संचालन किया और 'कुनमिंग फंड' की स्थापना की। इस फंड का उद्देश्य दुनिया भर में बायोडायवर्सिटी सुरक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
-
Q: एरिवन पाथ क्या है? A: यह 'कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक विश्वव्यापी रास्ता है। इसका उद्देश्य वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए एक योजना तैयार करना है।
-
Q: बायोडायवर्सिटी सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है? A: इसके लिए वित्तीय सहायता, सामाजिक जागरूकता और देशों की भागीदारी की आवश्यकता है। सामुदायिक स्तर पर गतिविधियों को बढ़ाना और वित्तीय सहायता प्रदान करना बहुत महत्वपूर्ण है।
-
Q: चीन ने इस बार की सफलता में क्या योगदान दिया? A: चीन ने 'कुनमिंग डायलॉग' का संचालन किया और 'कुनमिंग फंड' की स्थापना की। इस फंड का उद्देश्य दुनिया भर में बायोडायवर्सिटी सुरक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34385548
संबंधित लेख

मध्य चुनाव के बाद कांग्रेस पर नियंत्रण: ट्रम्प टीम ने आम आदमी की बातों को नजरअंदाज करके कार्यकारी शक्ति का उपयोग करने की योजना बनाई है
ट्रम्प टीम की योजना बताती है कि वे कैसे कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल करने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी के बाद भी अपने अभियान को आगे बढ़ाएंगे।

वेस्ट वर्जीनिया के डेटा सेंटर प्लान और अंधेरे आकाशों की रक्षा
वेस्ट वर्जीनिया के डेटा सेंटर प्लान और अंधेरे आकाशों की रक्षा

नॉर्वेजियन क्रूज़ लाइन के शेयरों में 13% की तेज़ी, अपेक्षाओं से बेहतर आय और विस्तारित भविष्य संकेत
नॉर्वेजियन क्रूज़ लाइन होल्डिंग्स ने तीसरे तिमाही के आंकड़ों के बाद अपने भविष्य संकेतों को बढ़ाया, जिससे शेयर मूल्य 13% तक बढ़ गए।

Rivian की तीसरी तिमाही की कमाई: R2 के डिलीवरी और सॉफ्टवेयर राजस्व से बेहतर प्रदर्शन
Rivian ने अपनी नई R2 SUV के लिए बेहतर उत्पादन और सॉफ्टवेयर राजस्व के साथ तीसरी तिमाही की कमाई का अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया।

ट्रंप विरुद्ध वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ मुकदमे को जज ने खारिज किया
डोनाल्ड ट्रंप के 100 अरब डॉलर के मुकदमे को फेंक दिया गया, जिसमें उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल को जेफ्री एपस्टाइन के लिए लिखे गए पत्र के बारे में रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

बिनांस: सुरक्षा समस्या, 63 अरब डॉलर प्रभावित, हैकिंग या त्रुटि?
बिनांस ने सुरक्षा समस्या की रिपोर्ट पर जांच की है, जिसमें लगभग 63 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। यह एक बड़ी हैकिंग घटना है या तकनीकी त्रुटि? यहाँ विस्तृत विश्लेषण है।

इजराइल का चुनाव: 61 मतों की सीमा का राजनीतिक खेल, नेतान्याहू की रणनीति और विभाजित जनता
इजराइल में आज भी कोई भी पार्टी 61 सीटों तक नहीं पहुंच पाई है। इसके पीछे राजनीतिक रणनीतियां, जनसांख्यिकीय विभाजन और ऐतिहासिक रूप से बनी रहने वाली जटिलताएं हैं।

G20 बाहरी मंत्रियों की बैठक: यूक्रेन और ईरान की समस्याओं को छोड़कर एक समझौते पर नहीं पहुँची
जी20 बाहरी मंत्रियों की बैठक ने अंततः यूक्रेन और ईरान की विवादों को लेकर सहमति नहीं बनाई, जिससे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई है।
नवीनतम लेख
- स्पेनिश ट्रेन दुर्घटना के बाद वायरल वीडियो फेक है, यह 6 साल पुराना है
- बाइनेंस द्वारा हुई $63 अरब क्रिप्टो चोरी: उत्तरी कोरिया और क्रिप्टो एक्सचेंज की सुरक्षा
- एंथ्रोपिक की दो सबसे दिलचस्प जोखिम: तकनीकी विकास और बाजार बदलाव का विश्लेषण
- रूस-यूक्रेन संघर्ष में शांति सम्मेलन की रणनीतिक खामोशी: दोनों पक्षों के बीच गहरा अंतर
- चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नियंत्रण और शुद्धता की नीति: विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स
- स्टारबक्स की अमेरिकी कंपनी वापसी: आंतरराष्ट्रीय मंच पर चुनौतियां