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ब्रिक्स सहयोग के 20 साल: व्यापार से एआई तक, ग्लोबल साउथ की नई ताकत

ब्रिक्स के 20 साल: आपसी व्यापार 842 अरब डॉलर से 1.17 ट्रिलियन डॉलर तक, नई विकास बैंक और एआई सहयोग से ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं को नई दिशा।

स्रोत: thepaper.cn

ब्रिक्स सहयोग तंत्र को 20 साल पूरे हो चुके हैं। यह सिर्फ एक राजनयिक मील का पत्थर नहीं है, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यापार, निवेश और तकनीकी साझेदारी का एक नया ढांचा बनने की कहानी है। जब वैश्विक व्यापार संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक अनिश्चितता से जूझ रहा है, तब ब्रिक्स का विस्तार और इसकी संस्थागत मजबूती विकासशील देशों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता दिखाती है। भारत के लिए यह विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि वह इस समूह का संस्थापक सदस्य होने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ का प्रमुख वाहक भी है।

ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ता व्यापार और सहयोग

मुख्य बातें

  • आपसी व्यापार में 13 गुना उछाल: संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच वस्तु व्यापार 2003 के 84.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर हो गया। यह 13.3 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर है, जो उस अवधि में वैश्विक व्यापार वृद्धि से कहीं तेज रही।

  • एयर कार्गो कॉरिडोर की सफलता: चीन के शियामेन और ब्राजील के साओ पाउलो के बीच शुरू हुआ क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स एयर कॉरिडोर तीन साल से सक्रिय है। यह मार्ग चीन, ब्राजील और दक्षिण अमेरिका के बीच आपूर्ति श्रृंखला को सीधा जोड़ता है और छोटे निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच आसान बनाता है।

  • नई विकास बैंक की बढ़ती भूमिका: भारत में दिल्ली से मेरठ तक 82.15 किलोमीटर लंबे रैपिड रेल कॉरिडोर का वित्तपोषण आंशिक रूप से नई विकास बैंक (NDB) ने किया। इससे पहले सड़क मार्ग से 3-4 घंटे लगने वाली यात्रा अब लगभग एक घंटे में पूरी होती है।

  • हरित और डिजिटल परियोजनाएं: बैंक ने चीन के ताइयुआन वुसु नेट-ज़ीरो एयरपोर्ट, रूस के टोल रोड नेटवर्क विस्तार और दक्षिण अफ्रीका के डरबन कंटेनर टर्मिनल आधुनिकीकरण जैसी परियोजनाओं में निवेश किया है। ये परियोजनाएं बुनियादी ढांचे और जलवायु लक्ष्यों को एक साथ जोड़ती हैं।

  • एआई और नई औद्योगिक क्रांति साझेदारी: ब्रिक्स नई औद्योगिक क्रांति साझेदारी नवाचार केंद्र ने पांच साल में 130 से अधिक परियोजनाएं पूरी कीं, जिनमें 62 अरब युआन से अधिक का निवेश हुआ। मलेशिया में ड्यूरियन ग्रेडिंग के लिए एआई और सीटी स्कैन तकनीक का इस्तेमाल इसका उदाहरण है।

  • तकनीक हस्तांतरण का व्यावहारिक असर: मलेशियाई ड्यूरियन उद्योग में एआई आधारित छंटाई प्रणाली ने गुणवत्ता वर्गीकरण की सटीकता 98 प्रतिशत तक पहुंचाई, जो मैनुअल जांच से 40 गुना बेहतर है। इससे स्थानीय किसानों को निर्यात बाजार में बेहतर दाम मिलने लगे।

  • संस्थागत विस्तार: ब्रिक्स ने एआई विकास एवं सहयोग केंद्र, औद्योगिक क्षमता केंद्र और नई उत्पादक शक्ति अनुसंधान केंद्र जैसी संस्थाएं बनाई हैं। ये मंच सदस्य देशों के बीच नीति समन्वय और क्षमता निर्माण को संस्थागत आधार देते हैं।

  • व्यापार एकीकरण की दिशा: अगस्त 2026 की ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक में डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेवा व्यापार, हरित खनिज, एआई और विशेष आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने पर सहमति बनी। इसका लक्ष्य संस्थागत व्यापार व्यवस्थाओं की ओर बढ़ना है।

  • गहन विश्लेषण

    ब्रिक्स की असली ताकत उसके आकार में नहीं, बल्कि सदस्य देशों की आर्थिक संरचनाओं में परस्पर पूरकता में है। ब्राजील और रूस के पास कच्चा माल और ऊर्जा है, चीन के पास विनिर्माण क्षमता और तकनीक है, भारत के पास सेवाओं और सॉफ्टवेयर की ताकत है, जबकि दक्षिण अफ्रीका खनिज संपदा से समृद्ध है। यह पूरकता ही है जिसने आपसी व्यापार को 13 गुना बढ़ाया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह गति टिकाऊ है, क्योंकि सदस्यों के बीच व्यापार असंतुलन और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी मौजूद है।

    नई विकास बैंक का उदय इस बात का संकेत है कि ग्लोबल साउथ अब पश्चिमी वित्तीय संस्थाओं पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता। भारत के रैपिड रेल कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं दिखाती हैं कि यह बैंक केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित नहीं है। हालांकि, पारदर्शिता, ऋण स्थिरता और परियोजना चयन के मानकों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठते रहे हैं, जिनका समाधान बैंक की दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।

    भारत के लिए ब्रिक्स एक दोधारी रणनीति का मंच है। एक ओर वह ग्लोबल साउथ की एकजुटता और बहुध्रुवीय वित्तीय व्यवस्था की वकालत करता है, दूसरी ओर वह चीन के साथ व्यापार घाटे और सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर सतर्क भी रहता है। इसलिए भारत के लिए ब्रिक्स में सहयोग का अर्थ प्रतिस्पर्धा से बचना नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर साझेदारी तय करना है।

    आने वाले वर्षों में ब्रिक्स का एजेंडा व्यापार सुविधा से आगे बढ़कर एआई शासन, डेटा सुरक्षा, हरित ऊर्जा और स्थानीय मुद्रा में भुगतान जैसे विषयों पर केंद्रित होगा। इन क्षेत्रों में मानक तय करने वाला पक्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के नियम भी तय करेगा। यही कारण है कि ब्रिक्स का विस्तार केवल सदस्य संख्या का मामला नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    क्या ब्रिक्स भारत के लिए फायदेमंद है? हां, भारत को नई विकास बैंक से बुनियादी ढांचा वित्तपोषण, तकनीकी साझेदारी और निर्यात बाजारों तक पहुंच जैसे लाभ मिलते हैं। साथ ही यह मंच भारत को वैश्विक आर्थिक नियमों में अपनी आवाज़ मजबूत करने का अवसर देता है।

    क्या ब्रिक्स कोई साझा मुद्रा जारी करेगा? फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक योजना नहीं है। चर्चा मुख्य रूप से स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान और स्वतंत्र भुगतान प्रणालियों को बढ़ावा देने तक सीमित है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम हो सके।

    ब्रिक्स का विस्तार क्यों महत्वपूर्ण है? नए सदस्यों के जुड़ने से समूह की आर्थिक भार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ता है। इससे ग्लोबल साउथ की सामूहिक सौदेबाजी शक्ति मजबूत होती है और वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार की मांग को बल मिलता है।

    स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34056583

    स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34056583

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    #ब्रिक्स#ग्लोबल साउथ#भारत चीन व्यापार#नई विकास बैंक#एआई सहयोग#व्यापार निवेश

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