पितृत्व विवाद: बेटे की मौत के बाद पोता निकला जैविक नहीं, अदालत में दादा-दादी की लड़ाई
चीन में एक बुजुर्ग दंपती को पता चला कि उनका पोता उनके बेटे का जैविक पुत्र नहीं है। दो बार मुकदमा हारने के बाद अब उच्च न्यायालय में सुनवाई, दादा-दादी को मिलेगा दर्शन अधिकार?
स्रोत: thepaper.cn
एक बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद उसके माता-पिता को यह पता चला कि जिस बच्चे को वे आठ साल से अपना पोता मानकर पाल रहे थे, वह उनके बेटे का जैविक पुत्र ही नहीं है। यह मामला अब चीन के गुआंगशी उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है, जहां 16 सितंबर को पुनर्विचार सुनवाई होनी है। यह कहानी सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि चीन के कानूनी तंत्र की उस जटिलता को उजागर करती है जहां जैविक सत्य, कानूनी मान्यता और बच्चे के हित आपस में टकराते हैं।

मुख्य तथ्य
- घटना की शुरुआत: 2024 में बेटे आदोंग (बदला हुआ नाम) की डिलीवरी ड्राइवर के रूप में काम करते समय सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वह मूल पेशे से रेलवे ड्राइवर था और पिता की बीमारी के दौरान खर्च निकालने के लिए रात में खाना पहुंचाता था।
- संदेह की शुरुआत: अंतिम संस्कार के दौरान पत्नी हुआंग के असामान्य व्यवहार से परिवार को शक हुआ। रिवाज के मुताबिक बच्चे को पिता की अस्थि-कलश उठानी थी, लेकिन हुआंग ने पहले परीक्षा का बहाना बनाया और बाद में पैसे की मांग की।
- डीएनए परीक्षण: परिवार ने दो बार परीक्षण कराया। पहले दादा-पोते का और फिर तियानजिन की एक फोरेंसिक लैब में पिता-पुत्र का। दोनों रिपोर्टों में साफ हुआ कि आठ वर्षीय शियाओ यी (बदला हुआ नाम) आदोंग का जैविक पुत्र नहीं है।
- मुकदमा: दादा-दादी ने बहू पर धोखाधड़ी से बच्चा पालने का आरोप लगाते हुए गुआंगशी के बोबाई जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया। उन्होंने विरासत से वंचित करने, सार्वजनिक माफी, आठ साल का पालन-पोषण खर्च लगभग 19 लाख रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति और अंतिम संस्कार सहायता राशि सहित कुल 36 लाख रुपये से अधिक की मांग की।
- निचली अदालतों का फैसला: जिला और अपील अदालत दोनों ने दादा-दादी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र में आदोंग को पिता दर्ज किया गया था और परिवार ने वर्षों तक कोई आपत्ति नहीं जताई।
- सबूत पर सवाल: अदालत ने परिवार द्वारा कराए गए डीएनए परीक्षण को प्रक्रियात्मक खामियों के कारण मान्य नहीं माना, क्योंकि इसमें पहचान सत्यापन की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं थी और अभिभावक की जानकारी सुरक्षित नहीं रखी गई थी।
- कानूनी अड़चन: चीनी नागरिक संहिता के अनुसार पितृत्व को चुनौती देने का अधिकार केवल माता या पिता को है। दादा-दादी को इस मामले में वैध वादी नहीं माना गया, जिससे मुकदमा कानूनी गतिरोध में फंस गया।
- आगे की राह: उच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 में पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली है। परिवार के वकील का सुझाव है कि पहले दादा-दादी के दर्शन अधिकार (विजिटेशन राइट) पर दावा किया जाए, क्योंकि सीधे पितृत्व खंडन की राह बेहद कठिन है।
गहन विश्लेषण
यह मामला चीन के पारिवारिक कानून की उस बुनियादी दुविधा को दर्शाता है जहां जैविक सत्य और कानूनी स्थिरता के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। कानून "वैवाहिक पुत्र की अवधारणा" (मैरिटल प्रेज़म्पशन) पर चलता है, जिसका उद्देश्य बच्चों को स्थिरता और विरासत का अधिकार देना है। लेकिन जब डीएनए साबित कर देता है कि यह अवधारणा झूठी है, तब पीड़ित परिवार के पास कोई प्रभावी कानूनी रास्ता नहीं बचता।
दूसरी बड़ी समस्या सबूत की है। अदालत ने निजी तौर पर कराए गए परीक्षण को इसलिए खारिज किया क्योंकि उसमें बच्चे की जैविक मां की सहमति नहीं थी। यह बच्चे की निजता की रक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन इसी नियम का इस्तेमाल करके पत्नी ने अदालती परीक्षण से इनकार कर दिया, जिससे सच को कानूनी मान्यता ही नहीं मिल पाई। यह न्यायिक प्रक्रिया की एक ऐसी खाई है जिसका फायदा उस पक्ष को मिलता है जो सच छिपाना चाहता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस मामले में पांच पहलू एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं — वादी की पात्रता, सबूत की वैधता, धोखाधड़ी से पालन-पोषण का आधार, बच्चे का सर्वोच्च हित, और वैवाहिक पुत्र की कानूनी वैधता। इनमें से किसी एक को तोड़ना भी बेहद मुश्किल है। चीन में हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में तेजी आई है जहां डीएनए तकनीक सस्ती होने से छिपे हुए सच सामने आ रहे हैं, लेकिन कानून अभी भी 1980 के दशक की सोच पर आधारित है।
आगे की संभावना यह है कि अदालत दादा-दादी को दर्शन अधिकार दे सकती है, हालांकि चीनी कानून में दादा-दादी का दर्शन अधिकार भी स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है। बच्चा सात साल बाद वयस्क होकर खुद सच जानने का दावा कर सकेगा, लेकिन तब तक बुजुर्ग दंपती की सेहत और उम्र उनका साथ नहीं दे सकती। यह मामला चीन में पारिवारिक कानून सुधार की जरूरत को रेखांकित करता है, ताकि जैविक सत्य, बच्चे का हित और पीड़ित परिवार का न्याय तीनों को एक साथ संतुलित किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या दादा-दादी पोते का डीएनए परीक्षण खुद करा सकते हैं? चीनी कानून के अनुसार पितृत्व को चुनौती देने का अधिकार केवल माता-पिता को है। दादा-दादी निजी तौर पर परीक्षण करा सकते हैं, लेकिन अदालत उसे तब तक मान्य नहीं मानती जब तक बच्चे की जैविक मां की सहमति और उचित प्रक्रिया का पालन न हो।
अगर बच्चा जैविक पोता नहीं है तो क्या विरासत का अधिकार खत्म हो जाता है? कानूनी रूप से जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज पिता ही वैध पिता माना जाता है। जब तक अदालत पितृत्व को रद्द नहीं करती, बच्चा विरासत का हकदार बना रहता है। यही इस मामले की सबसे बड़ी कानूनी अड़चन है।
दादा-दादी को पोते से मिलने का अधिकार मिल सकता है? चीन में दादा-दादी के दर्शन अधिकार को लेकर कानून स्पष्ट नहीं है। अदालतें आमतौर पर बच्चे के हित को प्राथमिकता देती हैं। वकील का सुझाव है कि पहले इसी आधार पर दावा किया जाए, क्योंकि सीधे पितृत्व खंडन की राह बेहद कठिन है।
स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34045845
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