अमेरिकी होम सेल्स अगस्त में 2% गिरी: कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर, सप्लाई दशक में सर्वाधिक
अगस्त में अमेरिकी पुराने घरों की बिक्री 2% घटी, लेकिन सप्लाई 10 साल में सबसे ज्यादा और औसत कीमत 4,29,100 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। जानिए इसका मतलब।
अमेरिकी हाउसिंग मार्केट में एक अजीब विरोधाभास सामने आया है — घर बिकने की रफ्तार धीमी पड़ रही है, फिर भी कीमतें रुकने का नाम नहीं ले रहीं। अगस्त 2026 में पुराने घरों की बिक्री घटकर 39.8 लाख यूनिट (सालाना आधार पर समायोजित) रह गई, जो जून 2025 के बाद सबसे सुस्त गति है। इसके उलट बिक्री के लिए उपलब्ध घरों की संख्या 16.2 लाख तक पहुंच गई, जो एक दशक से अधिक समय की सबसे बड़ी सप्लाई है। यह स्थिति भारतीय पाठकों के लिए भी प्रासंगिक है, क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरें और मॉर्गेज ट्रेंड वैश्विक निवेश और रियल एस्टेट धारणा को प्रभावित करते हैं।

मुख्य बातें
- बिक्री में गिरावट: नेशनल एसोसिएशन ऑफ रीयल्टर्स (NAR) के अनुसार, अगस्त में पुराने घरों की बिक्री जुलाई की तुलना में 2% घटी। यह आंकड़ा क्लोज़िंग पर आधारित है, यानी ये सौदे जून-जुलाई में तय हुए थे, जब मॉर्गेज दरें वसंत से अधिक थीं।
- क्षेत्रीय असर: गिरावट सबसे ज्यादा पूर्वोत्तर (Northeast) और मध्य-पश्चिम (Midwest) में महसूस की गई, जहां इन्वेंट्री और मांग का संतुलन अलग रहा।
- सप्लाई का रिकॉर्ड: अगस्त के अंत में 16.2 लाख घर बिक्री के लिए उपलब्ध थे — जुलाई से 3.2% और पिछले साल से 5.9% अधिक। मौजूदा बिक्री गति पर यह 4.9 महीने की सप्लाई है, जो एक दशक में सबसे ऊंचा स्तर है।
- कीमतें फिर भी बढ़ीं: अगस्त में बिके घर की औसत कीमत 4,29,100 डॉलर रही, जो अगस्त 2025 से 1.6% अधिक और अगस्त महीने का नया रिकॉर्ड है। कीमतों में सबसे तेज बढ़त पूर्वोत्तर में दर्ज हुई, जहां इन्वेंट्री सबसे कम है।
- पश्चिम में गिरावट: पश्चिम (West) एकमात्र क्षेत्र रहा जहां औसत कीमत साल-दर-साल घटी, जो स्थानीय मंदी का संकेत देता है।
- प्रीमियम सेगमेंट मजबूत: 1 लाख से 2.5 लाख डॉलर के घरों की बिक्री सालाना आधार पर 10% घटी, जबकि 10 लाख डॉलर से महंगे घरों की बिक्री 3.9% बढ़ी। यह एकमात्र मूल्य-श्रेणी थी जहां बिक्री बढ़ी।
- घर ज्यादा दिन बिक रहे: अगस्त में घर औसतन 31 दिन तक बाजार में रहे, जबकि जुलाई में यह 29 दिन था — यानी खरीदार अधिक समय ले रहे हैं।
- खरीदारों का बदलता चेहरा: पूरी नकद राशि देने वाले खरीदार अगस्त की बिक्री में 27% रहे। पहली बार घर खरीदने वाले 30% रहे, जो जुलाई और पिछले साल दोनों से थोड़ा अधिक है। लेकिन निवेशक और दूसरे घर के खरीदार घटकर सिर्फ 15% रह गए, जो 2025 में 21% थे।
गहन विश्लेषण
इस डेटा का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि अमेरिकी हाउसिंग मार्केट में "सप्लाई बढ़ने पर कीमत गिरती है" वाला पारंपरिक नियम फिलहाल काम नहीं कर रहा। इसकी मुख्य वजह है मॉर्गेज दरों का ऊंचा स्तर, जिसने कई संभावित खरीदारों को बाहर कर दिया है। NAR के मुख्य अर्थशास्त्री लॉरेंस यून के अनुसार, मॉर्गेज दरें और घर की बिक्री विपरीत दिशाओं में चलती हैं, इसलिए ऊंची दरों के कारण मांग में मामूली गिरावट स्वाभाविक है। फिर भी साल के पहले आठ महीनों में कुल बिक्री 1.6% बढ़ी है, जो दिखाता है कि बाजार पूरी तरह ठप नहीं हुआ है।
दूसरा बड़ा संकेत यह है कि बाजार का आकार बदल रहा है। सस्ते और मध्यम दर्जे के घरों की मांग घट रही है, जबकि करोड़पति श्रेणी के घरों की बिक्री बढ़ रही है। इसका मतलब है कि जिन परिवारों को मॉर्गेज की जरूरत है, वे ऊंची दरों और रिकॉर्ड कीमतों के दोहरे दबाव में पिस रहे हैं, जबकि नकद खरीदार और संपन्न वर्ग बाजार को सहारा दे रहे हैं। निवेशकों और दूसरे घर के खरीदारों का हिस्सा 21% से 15% पर आना बताता है कि किराये की आय और पूंजीगत लाभ की गणना अब कम आकर्षक हो गई है।
भारतीय संदर्भ में देखें तो यह रुझान परिचित लगता है — मुंबई, बेंगलुरु या गुरुग्राम जैसे शहरों में भी ऊंची ब्याज दरें और महंगे घर पहली बार खरीदारों को बाजार से बाहर धकेल रहे हैं, जबकि लक्जरी सेगमेंट में मांग बनी हुई है। अगर अमेरिकी मॉर्गेज दरें आने वाले महीनों में नरम पड़ती हैं, तो अगले साल की शुरुआत में बिक्री में सुधार संभव है। लेकिन अगर दरें ऊंची बनी रहीं, तो सप्लाई का यह रिकॉर्ड स्तर घर बेचने वालों के लिए कीमत घटाने का दबाव बना सकता है — खासकर पश्चिमी राज्यों में, जहां कीमतें पहले ही गिर रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अगर घरों की सप्लाई इतनी बढ़ गई है तो कीमतें क्यों नहीं गिर रहीं? क्योंकि मौजूदा मालिक अपने घर कम कीमत पर बेचने को तैयार नहीं हैं, खासकर जब उन्होंने कम ब्याज दरों पर लोन लिया था। साथ ही पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्रों में इन्वेंट्री कम है, जिससे वहां कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
क्या यह गिरावट भारतीय रियल एस्टेट को भी प्रभावित करेगी? सीधा असर सीमित है, लेकिन वैश्विक निवेशकों की धारणा और विदेशी फंडिंग पर पड़ने वाले असर से भारतीय प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट प्रभावित हो सकता है। भारत में मॉर्गेज दरें और स्थानीय आय-स्तर अधिक निर्णायक रहते हैं।
पहली बार घर खरीदने वालों का हिस्सा 30% क्यों बढ़ा? संभवतः कुछ खरीदारों ने ऊंची दरों को अस्थायी मानकर सौदे पूरे किए, और बिल्डरों ने सस्ते सेगमेंट में रियायतें दीं। हालांकि यह हिस्सा अभी भी ऐतिहासिक औसत से कम है।
स्रोत URL: https://www.cnbc.com/2026/09/10/home-sales-august-supply.html
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