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अमेरिका बैटरी क्षेत्र में चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश में, लेकिन चुनौतियाँ बड़ी

अमेरिका चीन पर बैटरी निर्भरता कम करने के लिए $500 मिलियन का निवेश कर रहा है, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार यह राशि अपर्याप्त है। चीन के पास आपूर्ति श्रृंखला के हर चरण में अधिकार है। जानें क्यों यह मुश्किल है।

अमेरिकी प्रशासन बैटरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और चीन पर निर्भरता घटाने के लिए कदम उठा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रयास अपर्याप्त है। हाल ही में ऊर्जा विभाग ने बैटरी सामग्री, विनिर्माण और रीसाइक्लिंग से जुड़ी सात कंपनियों को 500 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की। यह राशि उस विशाल निवेश की तुलना में बहुत कम है जो चीन के दबदबे को कम करने के लिए आवश्यक है। चीन के पास कच्चे खनिजों से लेकर तैयार इलेक्ट्रिक वाहनों तक, आपूर्ति श्रृंखला के हर चरण में अधिकार है। आइए समझते हैं कि अमेरिका के सामने क्या चुनौतियाँ हैं और क्या यह प्रयास सफल हो सकता है।

मुख्य बिंदु

  • अमेरिकी सरकार का नया निवेश: ऊर्जा विभाग ने अगस्त 2026 में बैटरी खनिज, सामग्री, विनिर्माण और रीसाइक्लिंग से जुड़ी सात कंपनियों को 500 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की। यह पैसा बाइडेन युग के इंफ्रास्ट्रक्चर कानून के तहत बने दो 3 अरब डॉलर के कार्यक्रमों से आता है।

  • चीन की वैश्विक पकड़: चीन बैटरी आपूर्ति श्रृंखला के कई चरणों में बहुमत हिस्सेदारी रखता है - कच्चे माल, रिफाइनिंग, केमिकल्स से लेकर तैयार उत्पादों तक। विशेष रूप से, चीन दुनिया के 85% कैथोड सक्रिय सामग्री और 90% से अधिक एनोड सक्रिय सामग्री का उत्पादन करता है।

  • रिफाइनिंग में चीन की ताकत: चीन की असली ताकत खनिजों के शोधन (रिफाइनिंग) में है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2020 से चीन की हिस्सेदारी बढ़ी है। चीन ने 2025 में दुर्लभ मिट्टी और अन्य खनिजों पर निर्यात प्रतिबंध लगाकर इस स्थिति का लाभ उठाया।

  • नई कंपनियों का प्रयास: DOE द्वारा वित्त पोषित कंपनियाँ चीन के मजबूत क्षेत्रों को लक्षित कर रही हैं। उदाहरण के लिए, Coreshell Technologies को 50 मिलियन डॉलर मिले हैं; यह कंपनी चीनी ग्रेफाइट के बजाय घरेलू सिलिकॉन से बैटरी एनोड बनाती है। Lilac Solutions को 100 मिलियन डॉलर मिले हैं; यह समुद्री जल से लिथियम निकालने की तकनीक विकसित करती है, जिससे चीन की प्रोसेसिंग पर निर्भरता कम होती है।

  • लिथियम बाजार का विस्तार: वैश्विक लिथियम बाजार 2015 में 150,000 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025 में 1.5 मिलियन मीट्रिक टन हो गया। अधिकांश वृद्धि हार्ड रॉक खनन से हुई, और इसका 95% प्रोसेसिंग चीन में होता है। Lilac Solutions की तकनीक इस प्रोसेसिंग को दरकिनार कर सीधे उत्पादन स्थल पर बैटरी-ग्रेड लिथियम बनाती है।

  • स्केल का लाभ: चीन की सबसे बड़ी ताकत उसका पैमाना है। CATL, दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी निर्माता, चीन में स्थित है और अपनी मजबूत विनिर्माण क्षमता के कारण बहुत लाभदायक है। अमेरिकी कंपनियों के लिए इस स्तर की प्रतिस्पर्धा करना कठिन है।

  • ईवी बाजार में अंतर: चीन में नई ऊर्जा वाहन (हाइब्रिड, ईवी, एक्सटेंडेड-रेंज ईवी) जुलाई में नई कार बिक्री का 65% थे, जबकि अमेरिका में यह 24% था। अमेरिका में ईवी विकास धीमा पड़ने से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी ऑटोमेकर्स पीछे रह सकते हैं।

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    गहन विश्लेषण

    अमेरिका का यह प्रयास एक लंबी दौड़ की शुरुआत मात्र है। विश्लेषकों के अनुसार, चीन की तरह व्यापक आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए दशकों और सैकड़ों अरबों डॉलर की आवश्यकता होगी, जबकि अमेरिका के पास केवल 5-7 साल हैं। ट्रम्प प्रशासन ने बाइडेन युग की कई नीतियों को पलट दिया है, जिसमें ईवी टैक्स क्रेडिट समाप्त करना और बैटरी परियोजनाओं को रद्द करना शामिल है। जनवरी 2025 से अब तक लगभग 24 अरब डॉलर की बैटरी परियोजनाएँ रद्द हो चुकी हैं। यह विरोधाभासी है कि सरकार एक ओर निवेश कर रही है, दूसरी ओर नीतियों से उसे कमजोर कर रही है।

    चीन की रणनीति स्पष्ट है - वह घरेलू स्तर पर ईवी को बढ़ावा दे रहा है और निर्यात भी बढ़ा रहा है। इससे चीन को बैटरी तकनीक में निरंतर नवाचार और लागत कम करने का अवसर मिलता है। अमेरिकी कंपनियाँ नवाचार में आगे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन की चुनौती बनी हुई है। स्टार्टअप्स प्रोटोटाइप बना सकते हैं, लेकिन लाखों इकाइयों की गुणवत्ता के साथ बड़े पैमाने पर उत्पादन करना दूसरी बात है।

    भविष्य में, ऊर्जा भंडारण की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो 2022 से औसतन 70% सालाना बढ़ रही है। हालाँकि ईवी अभी भी लिथियम-आयन बैटरी का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, लेकिन ऊर्जा भंडारण में विविधता आ सकती है। अमेरिका को चीन के दबदबे को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति और सुसंगत नीतियों की आवश्यकता है। फिलहाल, यह 500 मिलियन डॉलर एक कदम है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    क्या अमेरिका चीन पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त कर सकता है?

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह असंभव है, कम से कम अगले दशक में। चीन की आपूर्ति श्रृंखला में गहरी पैठ है, और अमेरिका के पास न तो पर्याप्त समय है और न ही धन। हालाँकि, कुछ क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, जैसे लिथियम निष्कर्षण और एनोड सामग्री।

    अमेरिकी उपभोक्ताओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

    इससे ईवी की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि घरेलू उत्पादन शुरू में महंगा होगा। लेकिन लंबे समय में, यह आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित कर सकता है और चीन पर निर्भरता कम कर सकता है, जिससे भू-राजनीतिक जोखिम कम होंगे।

    क्या भारत के लिए कोई सबक है?

    भारत भी बैटरी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर है। भारत को चाहिए कि वह घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे और लिथियम जैसे खनिजों के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करे। सरकारी नीतियों में स्थिरता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण आवश्यक है।

    स्रोत URL: https://www.cnbc.com/2026/09/08/heres-where-the-us-is-behind-china-on-battery-technology.html

    स्रोत URL: https://www.cnbc.com/2026/09/08/heres-where-the-us-is-behind-china-on-battery-technology.html

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    #बैटरी तकनीक#चीन#अमेरिका#ईवी#आपूर्ति श्रृंखला#लिथियम

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