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अमेरिकी मध्यस्थता का खेल: रूस-यूक्रेन संघर्ष में क्यों नहीं बन पा रही बात?

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी दूतों की नई कोशिशें, तीन दिन की अस्थायी रोक, और असली वजहें जो इस संघर्ष को सुलझने से रोक रही हैं। जानिए पूरा विश्लेषण।

स्रोत: thepaper.cn

रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने एक बार फिर कूटनीतिक पहल की है। राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर ने हाल ही में मॉस्को और कीव का दौरा कर दोनों देशों के बीच बातचीत की नई कोशिश की। हालांकि, इस दौरे का नतीजा सिर्फ तीन दिनों के लिए राजधानियों पर हमले रोकना रहा, जो एक अस्थायी कदम है। असली सवाल यह है कि क्या यह मध्यस्थता स्थायी शांति ला पाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी दांव-पेच और दोनों पक्षों की अटूट मांगों के कारण यह संघर्ष जल्द सुलझता नहीं दिख रहा। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को गहराई से समझते हैं।

अमेरिकी दूतों की मध्यस्थता

मुख्य बिंदु

  • अमेरिकी दूतों का दौरा: विटकॉफ और कुशनर ने 5 सितंबर को मॉस्को में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की और अगले दिन कीव में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से बातचीत की। यह विटकॉफ की इस साल पहली रूस यात्रा थी।
  • वार्ता का एजेंडा: रूसी राष्ट्रपति सहायक उशाकोव ने बताया कि बातचीत "सार्थक, रचनात्मक और बेहद खुली" रही। मुख्य मुद्दों में संघर्ष समाधान का अमेरिकी प्रस्ताव और रूस पर लगे प्रतिबंध शामिल थे। पुतिन ने राजनीतिक-कूटनीतिक समाधान की इच्छा दोहराई, लेकिन संघर्ष की जड़ों को खत्म करने की शर्त पर अड़े रहे।
  • तीन दिन की रोक: दौरे का एकमात्र ठोस नतीजा यह रहा कि 5 से 7 सितंबर तक दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की राजधानियों पर हमले रोके। यह समझौता अमेरिकी प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए किया गया था, न कि शांति की दिशा में कोई बड़ा कदम।
  • यूक्रेन की मांगें: ज़ेलेंस्की ने बातचीत में सर्दियों के लिए सहायता और सुरक्षा गारंटी के मुद्दे उठाए। उन्होंने बातचीत को "बहुत व्यावहारिक" बताया, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
  • मैदानी हालात: मोर्चे पर कोई बदलाव नहीं आया। डोनबास और ज़ापोरिज़िया में ज़मीनी लड़ाई, तोपखाने और ड्रोन हमले जारी हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 5-6 सितंबर की रात 258 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए गए।
  • रूस का रुख: पुतिन ने विटकॉफ से कहा कि यूक्रेन ने तीन दिन के व्यापक युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन रूस ने इसे ठुकरा दिया। विश्लेषकों का कहना है कि रूस को पूर्ण युद्धविराम से नुकसान होगा, क्योंकि उसे मैदान पर बढ़त हासिल है।
  • अमेरिकी घरेलू राजनीति: कतर के अल-जज़ीरा सहित कई मीडिया का मानना है कि ट्रंप प्रशासन मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान मुद्दे पर अपनी नाकामी से ध्यान हटाने और अपनी छवि सुधारने के लिए यह कदम उठा रहा है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष का असर

गहन विश्लेषण

अमेरिकी मध्यस्थता के इस दौर का सबसे बड़ा दोष यह है कि यह सतही है। तीन दिन की रोक को छोड़ दें, तो कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। असल में, यह मध्यस्थता अमेरिकी घरेलू राजनीति की उपज है। ट्रंप प्रशासन चुनावों से पहले एक कूटनीतिक जीत दिखाना चाहता है, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच मूलभूत मतभेद इतने गहरे हैं कि कोई बाहरी ताकत उन्हें आसानी से सुलझा नहीं सकती।

पहली बात, क्षेत्रीय मुद्दा। यूक्रेन अपनी सीमाओं को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता, जबकि रूस कब्जे वाले इलाकों को छोड़ने को तैयार नहीं है। दूसरी बात, सुरक्षा गारंटी। यूक्रेन चाहता है कि पश्चिमी देश उसे सुरक्षा की गारंटी दें, लेकिन रूस इसका विरोध करता है, खासकर पश्चिमी सैन्य उपस्थिति का। तीसरी बात, युद्ध के मैदान की स्थिति। दोनों पक्ष अब भी सैन्य तरीके से अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं, जिससे बातचीत की गुंजाइश कम हो जाती है।

एक और अहम पहलू यह है कि अमेरिका खुद इस संघर्ष का एक पक्ष है। वह यूक्रेन को भारी सैन्य और खुफिया सहायता दे रहा है, इसलिए वह निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हो सकता। रूस इसे अच्छी तरह समझता है, इसलिए वह अमेरिकी प्रस्तावों पर भरोसा नहीं करता। रूसी विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की मध्यस्थता सिर्फ अपने हितों के लिए है, और वह स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध नहीं है।

आगे का रास्ता मुश्किल है। जब तक दोनों पक्षों की युद्ध क्षमता कम नहीं होती या उनकी इच्छाशक्ति कमजोर नहीं पड़ती, तब तक पूर्ण युद्धविराम और शांति समझौता संभव नहीं लगता। अमेरिकी प्रशासन को भी यह समझना होगा कि हर छह महीने में एक बार बातचीत की मेज पर लौटने से समस्या हल नहीं होगी। उसे निरंतर और निष्पक्ष भूमिका निभानी होगी, जो फिलहाल नहीं दिख रही।

भविष्य की चुनौतियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: क्या अमेरिकी मध्यस्थता से रूस-यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म हो सकता है?

जवाब: फिलहाल इसकी संभावना बहुत कम है। दोनों पक्षों के बीच मूलभूत मतभेद हैं, और अमेरिका खुद एक पक्ष है। जब तक ये हालात नहीं बदलते, युद्ध जारी रहने की संभावना है।

सवाल: तीन दिन के युद्धविराम का क्या महत्व था?

जवाब: यह सिर्फ अमेरिकी दूतों की सुरक्षा के लिए एक अस्थायी कदम था। इसका मकसद बातचीत का माहौल बनाना था, लेकिन इससे युद्ध की दिशा पर कोई असर नहीं पड़ा।

सवाल: क्या रूस और यूक्रेन के बीच सीधी बातचीत संभव है?

जवाब: सैद्धांतिक रूप से संभव है, लेकिन व्यावहारिक रूप से बहुत मुश्किल है। दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी है, और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बातचीत को जटिल बनाता है।

स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34027081

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