AI युग में कला की आत्मा: हांगकांग एकेडमी की प्राचार्य चेन सोंगयिंग का दृष्टिकोण
हांगकांग परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी की प्राचार्य चेन सोंगयिंग का मानना है कि AI रचनात्मकता का सहायक है, प्रतिस्थापन नहीं। पारंपरिक कौशल, मानवीय भावना और 'आत्मा वाले कलाकार' बनाम 'निर्देश देने वाले' की बहस पर उनके विचार पढ़ें।
स्रोत: thepaper.cn
AI का दौर जिस तेजी से कला और संस्कृति के क्षेत्र में पैर पसार रहा है, उसके बीच एक सवाल बार-बार उठता है: क्या AI से बनी रचनाएँ 'कला' कहलाने की हकदार हैं? क्या कोई मशीन कभी इंसानी भावनाओं को समझ सकती है? हांगकांग परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी (HKAPA) की प्राचार्य और पेशेवर डांसर चेन सोंगयिंग (Chen Songying) का जवाब साफ है—कला की आत्मा हमेशा इंसान के पास रहेगी। उन्होंने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि AI एक 'सहायक शिक्षक' है, न कि पसीना बहाने का विकल्प। आइए जानते हैं कि एशिया की नंबर-1 परफॉर्मिंग आर्ट्स संस्थान की प्रमुख AI को किस नज़र से देखती हैं।
मुख्य बिंदु
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AI को 'सहायक' के रूप में देखना: चेन सोंगयिंग का मानना है कि AI को रचनात्मक प्रक्रिया में 'सहायक शिक्षक' की तरह इस्तेमाल करना चाहिए, जो रिहर्सल और निर्माण को बेहतर बनाए, लेकिन मेहनत और अभ्यास की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक कौशल की परीक्षा में कोई छूट नहीं दी जाएगी।
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कला का मूल 'इंसान' है: जब पूछा गया कि क्या AI द्वारा बनाई गई रचनाएँ कला हैं, तो उन्होंने कहा कि असली कला का फैसला मशीन नहीं, बल्कि 'इंसान की पसंद' करती है। AI के पास जीवन का अनुभव नहीं है, इसलिए वह कला की आत्मा को नहीं समझ सकती।
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आलोचनात्मक सोच और सहानुभूति: उन्होंने जोर दिया कि AI के दौर में कला शिक्षा का मुख्य लक्ष्य छात्रों में आलोचनात्मक सोच, सौंदर्य संबंधी निर्णय और भावनात्मक सहानुभूति विकसित करना है। यही चीजें एक 'आत्मा वाले कलाकार' को 'निर्देश देने वाले' से अलग करती हैं।
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तकनीक का विरोध नहीं, बल्कि सहयोग: चेन सोंगयिंग ने कहा कि तकनीक और कला का मिलन नया नहीं है—पहले लाइटिंग और प्रोजेक्शन थे, अब AI और XR हैं। वे इसे एक 'रचनात्मक संवादी' के रूप में देखती हैं, जो नए विचारों को जन्म दे सकता है।
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पारंपरिक कला का संरक्षण: AI का उपयोग पुरानी स्क्रिप्ट्स और डांस नोटेशन को डिजिटली सहेजने में किया जा सकता है, लेकिन यह कभी भी लाइव प्रदर्शन के अनुभव और दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव की जगह नहीं ले सकता।
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शिक्षा में AI का समावेश: HKAPA अपने पाठ्यक्रम में AI नैतिकता और कॉपीराइट सुरक्षा के विषयों को शामिल कर रहा है, ताकि छात्र तकनीक का सही इस्तेमाल कर सकें।
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'धीमी रचना' का महत्व: ब्रिटिश फिल्म निर्माता क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म 'द ओडिसी' का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हाथ से बनाई गई कलाकृतियाँ और धीमी गति से की गई रचनाएँ AI के दौर में और भी मूल्यवान हो जाती हैं।
भविष्य के लिए 'जड़ें' और 'पंख': उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी कला की जड़ों में मजबूत होना चाहिए और साथ ही नई तकनीकों के साथ प्रयोग करने का साहस रखना चाहिए, ताकि वे 'सांस्कृतिक दूत' बन सकें।

गहन विश्लेषण
चेन सोंगयिंग का दृष्टिकोण उस समय में बेहद प्रासंगिक है जब दुनिया भर में AI-जनित सामग्री की बाढ़ आ गई है। उनका कहना है कि AI सिर्फ एक उपकरण है, लेकिन इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह इंसान की जिम्मेदारी है। वह 'धीमी रचना' (slow creation) की वकालत करती हैं, जो AI की तेज गति से अलग है। यह सिर्फ कला तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और उद्योग के लिए भी एक सबक है।
हांगकांग में डिजिटल एंटरटेनमेंट लीडरशिप फोरम (DELF) के दौरान HKAPA और साइबरपोर्ट के बीच हुए समझौते से साफ है कि कला और तकनीक के बीच सहयोग बढ़ रहा है। लेकिन चेन सोंगयिंग का जोर इस बात पर है कि तकनीक को कला के नियमों के अनुसार ढलना चाहिए, न कि इसके उलट। वह 'इंसान की आत्मा' को केंद्र में रखती हैं।
आने वाले समय में, कला विद्यालयों की भूमिका बदल सकती है—वे सिर्फ तकनीक सिखाने वाले नहीं रहेंगे, बल्कि नैतिकता और सौंदर्यबोध की शिक्षा देंगे। यह बदलाव जरूरी है, क्योंकि AI के दौर में वही कलाकार सफल होंगे जो अपनी मानवीय संवेदनाओं को बचाए रखेंगे। चेन सोंगयिंग का मानना है कि 'असली नवाचार परंपरा की गहरी समझ से पैदा होता है'—यह बात आज के तेज-तर्रार दौर में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या AI से बनी कला को असली कला माना जा सकता है?
चेन सोंगयिंग के अनुसार, यदि कोई कलाकार अपनी भावनाओं और विचारों को AI के माध्यम से अभिव्यक्त करता है, तो वह कला हो सकती है, क्योंकि इसमें इंसान की आत्मा होती है। लेकिन अगर AI बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के कुछ बनाता है, तो वह सिर्फ एक तकनीकी उत्पाद है, कला नहीं।
क्या AI कलाकारों की रचनात्मकता को कम कर देगा?
नहीं, चेन सोंगयिंग का मानना है कि AI रचनात्मकता को बढ़ा सकता है, बशर्ते कलाकार इसका सही इस्तेमाल करें। वह कहती हैं कि AI नए विचारों को जन्म दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा इंसान का होगा।
कला शिक्षा में AI का क्या स्थान होना चाहिए?
चेन सोंगयिंग के अनुसार, AI को एक 'सहायक उपकरण' के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए, जो छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाए, लेकिन पारंपरिक कौशल और मानवीय मूल्यों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।
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