ईरान संघर्ष ने अमेरिकी नौसेना का बजट खाली किया, 'गोल्डन फ्लीट' का सपना अधूरा
ईरान संघर्ष ने अमेरिकी नौसेना के बजट को चरमरा दिया है। ट्रंप की 'गोल्डन फ्लीट' योजना लागत, उद्योग और राजनीतिक बाधाओं के कारण अधूरी रह सकती है। जानिए विश्लेषण।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने अमेरिकी नौसेना की वित्तीय स्थिति को गहरे संकट में डाल दिया है। यह युद्ध न केवल सैन्य संसाधनों को खत्म कर रहा है, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप की महत्वाकांक्षी 'गोल्डन फ्लीट' (स्वर्ण बेड़ा) परियोजना के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। आइए समझते हैं कि यह संकट क्यों उभरा और इसका भविष्य पर क्या असर पड़ सकता है।

मुख्य बिंदु
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उच्च तीव्रता वाला युद्ध: फरवरी 2026 से अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ अभूतपूर्व सैन्य अभियानों में लगी है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी, काफिले की सुरक्षा और जमीनी लक्ष्यों पर हमले शामिल हैं। इससे नौसेना के संसाधन तेजी से खत्म हो रहे हैं।
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संसाधनों की कमी: नौसेना प्रमुख एडमिरल डैरिल कॉडल के अनुसार, युद्धपोतों की केवल एक-चौथाई संख्या ही तैनाती के लिए उपलब्ध है, जो युद्ध से पहले की तुलना में काफी कम है। रखरखाव की कमी के कारण 'बेड़ा सिकुड़न' प्रभाव देखा जा रहा है।
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गोला-बारूद की भारी खपत: सीएसआईएस के अनुमान के अनुसार, फरवरी से जुलाई के बीच अमेरिका ने 1500-1600 पैट्रियट मिसाइल और लगभग 200 थाड इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पैट्रियट मिसाइलों का स्टॉक अब 1700 से कम रह गया है।
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बजट में कोई प्रावधान नहीं: 2026 के वित्तीय वर्ष के बजट में 'एपिक रेज' ऑपरेशन के लिए कोई फंड नहीं रखा गया था। जून 2026 में व्हाइट हाउस ने 67 अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता मांगी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि नौसेना को कितना मिलेगा।
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'गोल्डन फ्लीट' की बढ़ती लागत: ट्रंप की योजना के तहत 20-25 नए युद्धपोत बनाने हैं। शुरुआती लागत 151 अरब डॉलर प्रति जहाज थी, लेकिन परमाणु ऊर्जा पर स्विच करने के बाद पहले जहाज की लागत 234 अरब डॉलर हो गई है। 15 जहाजों की कुल लागत 2750 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
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शिपयार्ड की अक्षमता: अमेरिकी शिपयार्ड पहले से ही देरी और लागत वृद्धि से जूझ रहे हैं। नौसेना के सर्वश्रेष्ठ शिपयार्ड भी छह महीने पीछे हैं और लागत 57% बढ़ चुकी है। वे परमाणु युद्धपोत बनाने में असमर्थ हैं।
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श्रम की कमी: अमेरिकी शिपयार्ड में श्रमिकों की भारी कमी है। 2030 तक एक चौथाई कार्यबल सेवानिवृत्त हो जाएगा, और अगले दशक में 250,000 अतिरिक्त श्रमिकों की आवश्यकता होगी।
राजनीतिक विरोध: डेमोक्रेटिक सांसदों ने 'गोल्डन फ्लीट' के लिए धन आवंटन का विरोध किया है। सीनेट में इस परियोजना के लिए धनराशि को अस्थायी विनियोग विधेयक से हटा दिया गया है।

गहन विश्लेषण
यह संकट अमेरिकी वैश्विक सैन्य महत्वाकांक्षा और सीमित वित्तीय संसाधनों के बीच गहरे टकराव को उजागर करता है। ट्रंप प्रशासन 'गोल्डन फ्लीट' के जरिए 20वीं सदी की समुद्री ताकत को फिर से हासिल करना चाहता है, लेकिन यह एक पुरानी सोच है। द्वितीय विश्व युद्ध में युद्धपोतों की सीमित भूमिका साबित हो चुकी थी, जबकि विमानवाहक पोत अधिक प्रभावी साबित हुए। आज के युग में हाइपरसोनिक मिसाइल, ड्रोन और स्मार्ट माइन्स जैसे सस्ते विकल्प बड़े युद्धपोतों के लिए खतरा हैं।
इसके अलावा, यह योजना अमेरिकी रक्षा उद्योग की कमजोरियों को भी उजागर करती है। शिपयार्ड की क्षमता, श्रम की कमी और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याएं इसे अव्यवहारिक बनाती हैं। यदि ट्रंप इस परियोजना को जबरन आगे बढ़ाते हैं, तो इससे नौसेना के अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों जैसे 'फोर्ड' श्रेणी के विमानवाहक पोतों पर असर पड़ेगा, जिससे समग्र नौसेना क्षमता असंतुलित हो जाएगी।
यह स्थिति अमेरिकी राजनीति में 'रणनीतिक पुरानी यादों' को भी दर्शाती है, जहां नेता वर्तमान चुनौतियों को नजरअंदाज करते हुए अतीत की महिमा को दोहराना चाहते हैं। इससे अमेरिकी नौसेना की वैश्विक तैनाती क्षमता कमजोर हो सकती है और वह 'बड़ी लेकिन कमजोर' स्थिति में पहुंच सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या 'गोल्डन फ्लीट' परियोजना को रद्द किया जा सकता है?
उत्तर: संभवतः इसे स्थगित या संशोधित किया जा सकता है। सीनेट में विरोध और बजट की कमी के कारण, ट्रंप को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, यह चुनावी वादा होने के कारण पूरी तरह रद्द होने की संभावना कम है।
प्रश्न: अमेरिकी नौसेना की वैश्विक ताकत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: ईरान संघर्ष में संसाधनों के खत्म होने से अमेरिका की वैश्विक निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता कमजोर होगी। अन्य क्षेत्रों में तनाव बढ़ने पर अमेरिका को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रश्न: क्या अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ लंबे समय तक युद्ध छेड़ने की क्षमता है?
उत्तर: वर्तमान गोला-बारूद भंडार और वित्तीय स्थिति को देखते हुए, अमेरिका लंबे युद्ध के लिए तैयार नहीं है। उसे या तो युद्ध समाप्त करना होगा या अतिरिक्त संसाधन जुटाने होंगे, जो राजनीतिक रूप से कठिन है।
स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34008492
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