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इज़राइल का नया लक्ष्य: ईरानी शासन का तख्तापलट

नेतन्याहू ने ईरानी शासन को उखाड़ फेंकने को इज़राइल का मुख्य लक्ष्य बताया। जानें इस बयान के पीछे की रणनीति, क्षेत्रीय तनाव और संभावित परिणाम।

स्रोत: thepaper.cn

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक सैन्य कार्यक्रम में कहा कि ईरानी शासन को उखाड़ फेंकना अब इज़राइल का 'मुख्य लक्ष्य' है और यह 'पहुंच में' है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है, और इज़राइल लेबनान में हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज़ कर रहा है। इस लेख में हम इस बयान के निहितार्थ, क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण करेंगे।

मुख्य बिंदु

  • नेतन्याहू का बयान: इज़राइली प्रधानमंत्री ने तेल अवीव में सेना प्रमुखों की बैठक में कहा कि ईरानी शासन को उखाड़ फेंकना इज़राइल का 'कोर लक्ष्य' है, और यह 'पहुंच में' है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को 'पहले से कहीं ज़्यादा कमज़ोर' और 'अस्तित्व के लिए संघर्षरत' बताया।
  • हिज़बुल्लाह सुरंगें: इज़राइली सेना ने घोषणा की कि उसने लेबनान के दक्षिण में अली ताहेर रिज के नीचे दो हिज़बुल्लाह भूमिगत सुरंगों पर कब्ज़ा कर लिया है। इन सुरंगों में कमांड सेंटर, हथियार डिपो और आवासीय क्षेत्र हैं, जिन्हें ईरान के वित्त पोषण से 20 सालों में बनाया गया था।
  • ईरान की चेतावनी: ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर इज़राइल अली ताहेर रिज के नीचे स्थित लक्ष्यों पर हमला करता है, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा।
  • इज़राइली रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया: इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा कि अगर ईरान इज़राइल पर हमला करता है, तो इज़राइल ईरान के सभी बुनियादी ढांचे, जिसमें ऊर्जा सुविधाएं शामिल हैं, को निशाना बनाएगा।
  • संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन: लेबनान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जून में हुए समझौते के बावजूद, इज़राइल ने लेबनान में कई सैन्य हमले जारी रखे हैं। समझौते के तहत इज़राइल को दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटानी थी और लेबनानी सेना को सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेनी थी।
  • क्षेत्रीय तनाव: यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में पहले से ही बढ़ते तनाव को और बढ़ा रहा है, जिससे व्यापक संघर्ष की आशंका पैदा हो गई है।

गहन विश्लेषण

नेतन्याहू का यह बयान इज़राइल की ईरान नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। पहले इज़राइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने और क्षेत्र में उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने पर केंद्रित था, लेकिन अब वह सीधे तौर पर शासन परिवर्तन की बात कर रहा है। यह बयान कई कारकों से प्रभावित हो सकता है: ईरान के भीतर चल रहे विरोध प्रदर्शन, आर्थिक संकट, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के खिलाफ बढ़ता दबाव। नेतन्याहू शायद मानते हैं कि ईरानी शासन अपने सबसे कमज़ोर बिंदु पर है, और इज़राइल इस मौके का फायदा उठाकर अपने दीर्घकालिक सुरक्षा खतरे को खत्म कर सकता है।

हालांकि, यह एक जोखिम भरा कदम है। ईरान के पास मज़बूत सैन्य क्षमताएं हैं, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन शामिल हैं, और वह अपने प्रॉक्सी समूहों के जरिए इज़राइल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, शासन परिवर्तन की कोशिशें अक्सर अप्रत्याशित परिणाम देती हैं, जैसा कि इराक और लीबिया में देखा गया। अगर ईरान में अराजकता फैलती है, तो इससे कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा मिल सकता है और क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

इसके अलावा, यह बयान अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ इज़राइल के रिश्तों को भी प्रभावित कर सकता है। अमेरिका ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिश कर रहा है, और इज़राइल का यह रुख उसके साथ टकराव पैदा कर सकता है। फिर भी, इज़राइल अपनी सुरक्षा के मामले में स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए जाना जाता है, और वह शायद अमेरिकी चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए अपनी रणनीति पर आगे बढ़ेगा।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इज़राइल ईरान पर सीधा सैन्य हमला करता है, या फिर यह बयान केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए था। किसी भी स्थिति में, मध्य पूर्व में स्थिति और अधिक जटिल और खतरनाक होती जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या इज़राइल वास्तव में ईरानी शासन को उखाड़ फेंक सकता है?

यह एक बहुत ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इज़राइल के पास सैन्य रूप से ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता है, लेकिन शासन परिवर्तन के लिए ज़मीनी हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी, जो बेहद जोखिम भरा है। अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि इज़राइल शासन को कमज़ोर करने के लिए तोड़फोड़ और गुप्त अभियानों का सहारा ले सकता है, लेकिन सीधे तौर पर शासन को उखाड़ फेंकना मुश्किल है।

इस बयान से ईरान-इज़राइल संघर्ष पर क्या असर पड़ेगा?

इस बयान से तनाव और बढ़ने की संभावना है। ईरान पहले ही इज़राइल को कठोर चेतावनी दे चुका है, और इज़राइल ने भी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। इससे दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है, जो पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है।

क्या अमेरिका इस संघर्ष में हस्तक्षेप करेगा?

अमेरिका इज़राइल का सबसे बड़ा सहयोगी है, लेकिन वह ईरान के साथ सीधे टकराव से बचना चाहता है। अमेरिका शायद इज़राइल को कूटनीतिक रूप से समर्थन देगा, लेकिन वह सीधे सैन्य हस्तक्षेप से परहेज कर सकता है। हालांकि, अगर संघर्ष बढ़ता है और अमेरिकी हितों को खतरा होता है, तो अमेरिका अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकता है।

स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34006850

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#इज़राइल#ईरान#नेतन्याहू#मध्य पूर्व संघर्ष#हिज़्बुल्लाह#सुरक्षा विश्लेषण

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