सुअर की किडनी 285 दिनों तक कार्यशील, गुर्दा प्रत्यारोपण की नई उम्मीद
जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर की किडनी ने मानव शरीर में 285 दिनों तक कार्य करके रिकॉर्ड बनाया है। यह अध्ययन गुर्दा रोगियों के लिए एक 'ब्रिज' के रूप में काम कर सकता है। जानें इसके निहितार्थ, सीमाएं और भविष्य की संभावनाएं।
स्रोत: thepaper.cn
चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। अमेरिका में एक मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर की किडनी 285 दिनों तक बिना डायलिसिस के कार्य करती रही, जो मानव इतिहास में सबसे लंबी अवधि है। यह घटना उन लाखों लोगों के लिए आशा की किरण है जो गुर्दे की विफलता से जूझ रहे हैं और दान किए गए मानव अंग की प्रतीक्षा में हैं। यह लेख इस अभूतपूर्व प्रयोग, इसकी सीमाओं और भविष्य में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में क्रांति लाने की इसकी क्षमता पर प्रकाश डालता है।
मुख्य तथ्य
- रिकॉर्ड तोड़ने वाला मामला: 3 सितंबर तक, एक महिला मरीज के शरीर में जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर की किडनी 285 दिनों तक कार्य करती रही, जो पिछले रिकॉर्ड (271 दिन) को तोड़ देता है। यह सुअर की किडनी को 'ब्रिज' थेरेपी के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- पहला मामला: टिम एंड्रयूज, जिन्होंने पहले सुअर की किडनी प्रत्यारोपित कराई थी, बाद में उन्हें मानव किडनी भी प्रत्यारोपित की गई। वे पहले ऐसे मरीज हैं जिन्होंने सुअर की किडनी के बाद मानव किडनी प्राप्त की। उनके मामले ने साबित किया कि सुअर की किडनी प्रत्यारोपण भविष्य में मानव किडनी प्रत्यारोपण में बाधा नहीं बनती।
- 69 आनुवंशिक संशोधन: मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल ब्रिघम (MGB) की टीम ने युकाटन मिनी पिग के जीनोम में 69 बदलाव किए। इनमें से कुछ संशोधनों ने सुअर की कोशिकाओं में मौजूद उन प्रोटीन्स को हटा दिया जो मानव प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा हमला किए जाते हैं, जबकि कुछ ने मानव डीएनए जोड़ा ताकि सुअर की कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली से बच सकें।
- अस्थायी समाधान की अवधारणा: डॉक्टरों का लक्ष्य है कि सुअर की किडनी मानव किडनी की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों के लिए एक 'पुल' का काम करे, जिससे वे डायलिसिस के दुष्प्रभावों से बच सकें और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हो सके।
- वैश्विक अंग संकट: अमेरिका में लगभग 1 लाख लोग किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं, जबकि यूके में 7,000 से अधिक। हर साल केवल 25,000 किडनी प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं। यह अंतर ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन (अंतर-प्रजाति प्रत्यारोपण) की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- सुरक्षा पहलू: शोधकर्ताओं ने पुष्टि की कि एंड्रयूज के मामले में न तो कोई सुअर वायरस और न ही कोई अन्य रोगज़नक़ पाया गया। इसके अलावा, सुअर की किडनी निकालने के बाद भी मानव किडनी के प्रति कोई नई एंटीबॉडी नहीं बनीं, जो सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- भविष्य की योजनाएं: बायोटेक कंपनी eGenesis ने FDA से 33 मरीजों पर क्लिनिकल ट्रायल की मंजूरी ली है, जो 2027 में शुरू होगा। कंपनी का लक्ष्य है कि सुअर की किडनी कम से कम एक साल तक काम करे।
गहन विश्लेषण
यह उपलब्धि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। पहले, सुअर की किडनी को सिर्फ एक असंभव प्रयोग माना जाता था, लेकिन अब यह एक व्यावहारिक विकल्प बनता जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि यह अभी भी प्रारंभिक चरण में है। सबसे बड़ी चुनौती प्रतिरक्षा अस्वीकृति है, जिसे इन आनुवंशिक संशोधनों के माध्यम से कम किया गया है, लेकिन पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सका है। इसके अलावा, ये परिणाम केवल कुछ व्यक्तियों पर आधारित हैं और इनमें नियंत्रण समूह नहीं है, इसलिए इन्हें सामान्यीकृत नहीं किया जा सकता। फिर भी, यह दृष्टिकोण अंगों की कमी के संकट को हल करने की दिशा में एक आशाजनक कदम है। यदि यह सफल होता है, तो यह न केवल गुर्दे की बीमारी बल्कि हृदय, यकृत जैसे अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में भी क्रांति ला सकता है। भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां अंग दान की दर बहुत कम है, यह तकनीक जीवन रक्षक साबित हो सकती है। हालांकि, इसे व्यापक रूप से अपनाने से पहले दीर्घकालिक सुरक्षा और प्रभावशीलता पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। आने वाले 10-15 वर्षों में, हम सुअर की किडनी को मानव किडनी के समकक्ष विकल्प के रूप में देख सकते हैं, जैसा कि शोधकर्ताओं का मानना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सुअर की किडनी प्रत्यारोपण सुरक्षित है?
फिलहाल, यह केवल प्रायोगिक चरण में है। शोधकर्ताओं ने सुअर के जीनोम में इस तरह के बदलाव किए हैं कि मानव शरीर इसे अस्वीकार न करे और सुअर से मानव में संक्रमण का खतरा भी कम हो। हालांकि, अभी तक केवल पांच मरीजों पर ही यह प्रयोग हुआ है, इसलिए इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
क्या यह विधि भारत में उपलब्ध हो सकती है?
भारत में अंग दान की कमी एक गंभीर समस्या है। यदि यह तकनीक सफल होती है, तो इसे भारत में लाने की संभावना है, लेकिन इसमें कई नैतिक, कानूनी और वैज्ञानिक चुनौतियां हैं। फिलहाल, यह केवल अमेरिका में क्लिनिकल ट्रायल के चरण में है, और इसे व्यापक रूप से उपलब्ध होने में कई साल लग सकते हैं।
सुअर की किडनी कितने समय तक काम कर सकती है?
वर्तमान रिकॉर्ड 285 दिनों का है, लेकिन शोधकर्ताओं का लक्ष्य इसे एक साल तक बढ़ाना है। यदि यह सफल होता है, तो भविष्य में यह स्थायी समाधान बन सकता है।
स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34008157
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