MyApp Analyze
भाषा:|MyCapital ↗
news·AI क्यूरेशन

शंघाई सहयोग संगठन: 'दूर होकर भी निरंतर' का संकल्प

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 'शंघाई भावना' और 'मूल संकल्प' पर जोर दिया। जानिए SCO के 25 वर्षों के सफर, विस्तार, और वैश्विक भूमिका के बारे में।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं बैठक 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में संपन्न हुई। इस अवसर पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में 'मूल संकल्प को न बदलना, दूर होकर भी निरंतर प्रयास करना' (初心不改,虽远不怠) की भावना का उल्लेख किया। यह बैठक SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक क्षण में हुई है, जब संगठन ने 6 सदस्यों से बढ़कर 27 देशों को शामिल कर लिया है। यह लेख SCO के सफर, उसके मूल सिद्धांतों और भविष्य की दिशा पर केंद्रित है।

मूल बातें

  • SCO की स्थापना और 'शंघाई भावना': SCO की स्थापना 2001 में हुई थी, और यह पहला अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका नाम किसी चीनी शहर के नाम पर रखा गया है। 'शंघाई भावना' में आपसी विश्वास, पारस्परिक लाभ, समानता, परामर्श, विविध सभ्यताओं का सम्मान और साझा विकास शामिल है। यह भावना SCO की नींव है और इसे 'मूल संकल्प' (चू शिन) कहा गया है।

  • विस्तार और विकास: SCO अब यूरोप, एशिया और अफ्रीका के 27 देशों तक फैला हुआ है। इसके सदस्य देशों की आबादी दुनिया की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा है। संगठन ने सुरक्षा से लेकर व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी तक 50 से अधिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है।

  • चीन की भूमिका: चीन SCO का संस्थापक सदस्य है और उसने हमेशा 'शंघाई भावना' का पालन किया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 से अब तक 14 बार SCO शिखर सम्मेलनों में भाग लिया है। चीन ने 'बेल्ट एंड रोड' पहल को SCO की विकास रणनीति से जोड़ा है, और कई परियोजनाओं को लागू किया है, जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहयोग केंद्र, बंदरगाह अर्थव्यवस्था केंद्र, और शिक्षा केंद्र।

  • नई पहल: बिश्केक बैठक में, शी जिनपिंग ने कई नई पहलों की घोषणा की, जिनमें अंतरराष्ट्रीय AI अनुप्रयोग सहयोग केंद्र, तियानजिन में चीन-SCO बंदरगाह अर्थव्यवस्था सहयोग केंद्र, और चीन-SCO बुनियादी शिक्षा सहयोग केंद्र शामिल हैं। साथ ही, 'चार सुरक्षा केंद्रों' को जल्द से जल्द सक्रिय करने का समर्थन किया गया।

  • महत्वपूर्ण सिद्धांत: शी जिनपिंग ने 'विकास को प्राथमिकता', 'सुरक्षा को महत्व', 'जन-केंद्रित दृष्टिकोण' और 'संवाद और परामर्श' के चार सिद्धांतों पर जोर दिया। ये सिद्धांत वैश्विक विकास, सुरक्षा, सभ्यता और शासन के लिए चीन के चार प्रस्तावों के अनुरूप हैं।

  • सहयोग का तरीका: SCO ने गुटबंदी, टकराव और तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के बजाय 'गैर-गुटबंदी, गैर-टकराव और गैर-लक्षित' सह-अस्तित्व का रास्ता अपनाया है। यह नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक उदाहरण है।

  • मानवीय पहलू: SCO ने शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए 'लू बान वर्कशॉप' (鲁班工坊) जैसी परियोजनाएं शुरू की हैं। ये परियोजनाएं आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देती हैं।

  • गहन विश्लेषण

    SCO का 25 वर्षों का सफर यह दर्शाता है कि यह संगठन केवल सुरक्षा मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास को भी प्राथमिकता देता है। 'शंघाई भावना' का सबसे बड़ा योगदान यह है कि इसने शीत युद्ध की मानसिकता और शून्य-राशि के खेल से ऊपर उठकर एक नया अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रतिमान स्थापित किया है। वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव के बीच, SCO एक ऐसे मंच के रूप में उभरा है जो संवाद और सहयोग को बढ़ावा देता है, खासकर 'वैश्विक दक्षिण' (Global South) के देशों के लिए।

    भविष्य में, SCO की चुनौती होगी कि वह अपने विविध सदस्यों के हितों को संतुलित करे। जहां एक ओर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव है, वहीं चीन और रूस की निकटता संगठन को एक नई दिशा दे सकती है। चीन की ओर से AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में नई पहल SCO को 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी। हालांकि, संगठन को आंतरिक मतभेदों को सुलझाने और सर्वसम्मति बनाने में सतर्क रहना होगा। यदि SCO अपने मूल संकल्प को बनाए रखता है, तो यह वैश्विक शासन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने में।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    प्रश्न: SCO का विस्तार भारत के लिए क्यों मायने रखता है?

    उत्तर: SCO में भारत की सदस्यता से उसे मध्य एशिया और चीन के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग के नए अवसर मिलते हैं। यह आतंकवाद और उग्रवाद जैसे मुद्दों पर साझा मंच प्रदान करता है, साथ ही भारत को वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपनी आवाज उठाने का अवसर देता है।

    प्रश्न: 'शंघाई भावना' का व्यावहारिक प्रभाव क्या है?

    उत्तर: 'शंघाई भावना' ने सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाया है और सीमा विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में मदद की है। यह क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है, जैसे चीन-मध्य एशिया व्यापार गलियारे का विकास।

    प्रश्न: क्या SCO का विस्तार नाटो के समानांतर है?

    उत्तर: नहीं, SCO एक सैन्य गठबंधन नहीं है। यह गैर-गुटबंदी और गैर-टकराव के सिद्धांतों पर आधारित है, जो नाटो जैसे सैन्य गठबंधनों से अलग है। SCO का ध्यान सुरक्षा सहयोग, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर है, न कि किसी तीसरे देश के खिलाफ।

    स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34000305

    स्रोत URL: https://www.thepaper.cn/newsDetail_forward_34000305

    टैग

    #शंघाई सहयोग संगठन#शी जिनपिंग#शंघाई भावना#SCO शिखर सम्मेलन#वैश्विक सहयोग#बहुध्रुवीय विश्व

    संबंधित लेख

    नेपाल भूस्खलन में फंसे चीनी नागरिक का बचाव, स्वास्थ्य स्थिर
    news

    नेपाल भूस्खलन में फंसे चीनी नागरिक का बचाव, स्वास्थ्य स्थिर

    नेपाल के उत्तरी रसुवा क्षेत्र में भूस्खलन में फंसे एक चीनी नागरिक को सफलतापूर्वक बचाया गया। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। जानें पूरी खबर और बचाव अभियान की जानकारी।

    #नेपाल#भूस्खलन#चीनी नागरिक
    अमेरिकी श्रम बाजार में 'कम भर्ती, कम छंटनी' का दौर, AI का प्रभाव दिखने लगा
    news

    अमेरिकी श्रम बाजार में 'कम भर्ती, कम छंटनी' का दौर, AI का प्रभाव दिखने लगा

    अमेरिकी श्रम बाजार में अगस्त 2026 में 1.62 लाख नौकरियां जुड़ीं, बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर। जानिए 'कम भर्ती, कम छंटनी' की स्थिति, AI के बढ़ते प्रभाव और फेडरल रिजर्व पर इसके संभावित असर के बारे में।

    #अमेरिकी श्रम बाजार#AI और रोजगार#फेडरल रिजर्व
    यूक्रेन का रूसी हवाई क्षेत्र को असुरक्षित घोषित करना: नागरिक उड्डयन पर नया संकट
    news

    यूक्रेन का रूसी हवाई क्षेत्र को असुरक्षित घोषित करना: नागरिक उड्डयन पर नया संकट

    यूक्रेन ने रूसी हवाई क्षेत्र को नागरिक उड्डयन के लिए असुरक्षित बताया है। जानें कैसे ड्रोन हमलों से रूसी हवाई अड्डे बाधित हो रहे हैं, वैश्विक उड़ान मार्गों पर क्या असर पड़ेगा, और किन एयरलाइनों को जोखिम है।

    #यूक्रेन-रूस संघर्ष#नागरिक उड्डयन सुरक्षा#ड्रोन हमले