मॉर्गेज दरें जून 2025 के बाद सबसे ऊपर, ईरान युद्ध और तेल की कीमतों का असर
ईरान युद्ध और बढ़ती तेल कीमतों के चलते मॉर्गेज दरें 6.87% पर पहुंच गई हैं, जो जून 2025 के बाद सबसे अधिक है। जानिए इसका घर खरीदारों पर क्या असर होगा और आगे क्या उम्मीद करें।
ईरान में फिर से शुरू हुए संघर्ष और तेल की कीमतों में उछाल ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बढ़ा दिया है, और इसका सीधा असर मॉर्गेज दरों पर पड़ा है। 30-वर्षीय फिक्स्ड लोन की औसत दर सोमवार को 6 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.87% हो गई, जो जून 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। यह वृद्धि उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि इससे उनकी मासिक किस्तें बढ़ जाएंगी और पात्रता पर भी असर पड़ेगा।
मुख्य बातें
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30-वर्षीय फिक्स्ड मॉर्गेज दर 6.87% पर पहुंची: मॉर्टगेज न्यूज़ डेली के अनुसार, सोमवार को यह दर 6 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.87% हो गई, जो पिछले 14 महीनों में सबसे अधिक है। गुरुवार से अब तक इसमें 12 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हो चुकी है, और पिछले दो महीनों में 30 बेसिस पॉइंट से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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तेल की कीमतों का दबाव: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे बॉन्ड यील्ड बढ़ी है और मॉर्गेज दरें भी ऊपर गई हैं। फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने से पहले 30-वर्षीय फिक्स्ड दर 5.99% थी।
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मासिक किस्तों पर प्रभाव: यदि कोई व्यक्ति 4,50,000 डॉलर (राष्ट्रीय औसत के करीब) का घर खरीदता है और 20% डाउन पेमेंट करता है, तो उसकी मासिक किस्त अब 2,363 डॉलर होगी, जो फरवरी के अंत की तुलना में 207 डॉलर अधिक है।
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ऋण पात्रता में कमी: ब्याज दरें बढ़ने से उधारकर्ताओं की पात्रता घटती है, क्योंकि ऋण-से-आय अनुपात (debt-to-income ratio) प्रभावित होता है। इससे कम लोग मॉर्गेज के लिए योग्य होंगे।
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घर की कीमतों में तेजी: पहले से बढ़ती घर की कीमतें अब कुछ क्षेत्रों में और तेज हो रही हैं, क्योंकि आपूर्ति कम है। जून में राष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में सालाना 1.5% की वृद्धि हुई, जो मई के 1.2% से अधिक है।
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मौजूदा मकान मालिक नहीं बेच रहे: उच्च ब्याज दरों के कारण, जिन लोगों ने पहले कम दरों पर लोन लिया था, वे अपने घर बेचने से बच रहे हैं, जिससे आपूर्ति और कम हो रही है।
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विशेषज्ञों की राय: मॉर्टगेज न्यूज़ डेली के सीओओ मैथ्यू ग्राहम के अनुसार, यह वृद्धि अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे हुई है, जो मुद्रास्फीति की उम्मीदों, उच्च बॉन्ड जारीकरण और आर्थिक मजबूती के कारण है।
गहन विश्लेषण
यह स्थिति अमेरिकी आवास बाजार के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय का संकेत है। पहले यह उम्मीद थी कि इस साल ब्याज दरों में गिरावट आएगी, लेकिन ईरान युद्ध ने सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया है। तेल की कीमतों में उछाल से मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे बॉन्ड यील्ड और मॉर्गेज दरें ऊपर जा रही हैं। यह केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है; वैश्विक स्तर पर भी इसका असर देखा जा सकता है। भारत जैसे उभरते बाजारों में भी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव से पूंजी प्रवाह और ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है।
आगे देखते हुए, अगर ईरान में संघर्ष और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे मॉर्गेज दरों में और वृद्धि हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि धीमी गति से हो रही है, इसलिए अचानक बड़ा उछाल आने की संभावना कम है। लेकिन घर खरीदारों के लिए यह समय मुश्किल है, क्योंकि उन्हें अधिक ब्याज देना पड़ रहा है और साथ ही घर की कीमतें भी बढ़ रही हैं। इससे पहली बार घर खरीदने वालों के लिए स्थिति और कठिन हो गई है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उच्च दरों के कारण मौजूदा मकान मालिक अपने घर बेचने से बच रहे हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति और कम हो रही है। यह एक चक्र बन गया है: कम आपूर्ति से कीमतें बढ़ती हैं, और उच्च कीमतों के कारण खरीदार और अधिक संघर्ष करते हैं। सरकार और केंद्रीय बैंक के लिए यह एक कठिन संतुलन है, क्योंकि उन्हें मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना है और साथ ही आवास बाजार को सहारा देना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मॉर्गेज दरें और बढ़ सकती हैं?
हां, अगर ईरान में संघर्ष जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो मॉर्गेज दरों में और वृद्धि संभव है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि धीमी गति से हो रही है, इसलिए अचानक बड़ा उछाल आने की संभावना कम है।
इसका भारतीय घर खरीदारों पर क्या असर पड़ेगा?
हालांकि यह अमेरिकी बाजार की खबर है, लेकिन वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में बदलाव का असर भारत में भी देखा जा सकता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है और आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति में इसे ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता है।
क्या अभी घर खरीदना सही रहेगा?
यह आपकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आपके पास पर्याप्त डाउन पेमेंट है और आप मासिक किस्तें वहन कर सकते हैं, तो घर खरीदना अभी भी एक अच्छा दीर्घकालिक निवेश हो सकता है। लेकिन अगर आप उच्च ब्याज दरों के कारण किस्तें नहीं उठा पा रहे हैं, तो कुछ समय इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
स्रोत URL: https://www.cnbc.com/2026/08/31/mortgage-rates-surge-middle-east-attacks-oil.html
स्रोत URL: https://www.cnbc.com/2026/08/31/mortgage-rates-surge-middle-east-attacks-oil.html
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