MyApp Analyze
भाषा:|MyCapital ↗
news·AI क्यूरेशन

स्टेम सेल का धंधा: 5000 रुपये प्रति घंटे का वार्ड और 17 लाख की उम्मीद

स्टेम सेल थेरेपी के नाम पर हो रहे फ्रॉड का खुलासा। जानिए कैसे मरीजों को ठगा जा रहा है, क्या है सच्चाई और नए नियमों का क्या असर होगा। पढ़ें पूरी जांच।

स्टेम सेल थेरेपी को अक्सर 'चमत्कारी इलाज' के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन क्या यह सच में कारगर है? हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कैसे कुछ कंपनियां मरीजों की जेब काट रही हैं, उन्हें झूठे वादों के साथ महंगे इलाज के जाल में फंसा रही हैं। एक मरीज ने 17 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क है जो मरीजों की उम्मीदों का फायदा उठा रहा है। आइए जानते हैं इस धंधे की पूरी कहानी, इसके पीछे की सच्चाई और सरकार के नए नियमों के बारे में।

मुख्य बातें

  • महंगा इलाज, बेकार परिणाम: एक मरीज ने स्टेम सेल थेरेपी पर 17 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने भी माना कि इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ।
  • झूठे वादों का जाल: कंपनियां मरीजों को 'नोबेल पुरस्कार विजेताओं' के नाम और 'अंतरराष्ट्रीय मान्यता' के झांसे में फंसाती हैं। कई बार तो पुराने और एक्सपायर हो चुके प्रमाणपत्र दिखाए जाते हैं।
  • महंगे वार्ड का खेल: मरीजों को इलाज के लिए अस्पतालों के महंगे वार्ड में भेजा जाता है, जहां एक घंटे का किराया 5000 रुपये तक होता है। इसका फायदा कंपनियां उठाती हैं।
  • जापान का झांसा: कुछ कंपनियां मरीजों को जापान ले जाकर इलाज का झांसा देती हैं, जहां दो कोर्स का खर्च 32 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। लेकिन असल में वहां भी कोई गारंटी नहीं होती।
  • एक्सपायर प्रमाणपत्र: कई कंपनियां अपने प्रचार में एक्सपायर हो चुके प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करती हैं, जिन्हें देखकर मरीज भरोसा कर लेते हैं।
  • कोई असर नहीं: ज्यादातर मामलों में मरीजों को कोई फायदा नहीं होता। कुछ मामलों में तो मरीजों को सिर्फ महंगा सलाइन (पानी) चढ़ाया जाता है, जिसे स्टेम सेल बताया जाता है।
  • नए नियम: भारत सरकार ने हाल ही में नए नियम बनाए हैं, जिसके तहत स्टेम सेल थेरेपी को लेकर सख्ती बरती जाएगी। अब बिना मंजूरी के इलाज करना मुश्किल होगा।

संबंधित छवि

गहन विश्लेषण

स्टेम सेल थेरेपी का यह धंधा सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में फैला हुआ है। यह उन मरीजों की निराशा का फायदा उठाता है, जिन्हें पारंपरिक इलाज से कोई राहत नहीं मिली है। कंपनियां मरीजों की इसी निराशा को भुनाती हैं और उन्हें 'चमत्कारी इलाज' का सपना दिखाती हैं।

इस धंधे की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें भरोसा बनाने के लिए कई तरह के दांव-पेंच इस्तेमाल किए जाते हैं। कंपनियां अपने प्रचार में नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम, बड़े अस्पतालों के नाम और 'अंतरराष्ट्रीय मान्यता' का सहारा लेती हैं। लेकिन असल में इनमें से कई दावे झूठे होते हैं।

भारत में हाल ही में लागू हुए नए नियम (बायोमेडिकल नई तकनीकों के नियम) इस धंधे पर लगाम लगाने की कोशिश है। इन नियमों के तहत, स्टेम सेल थेरेपी को अब सिर्फ अस्पतालों में ही किया जा सकेगा, और उसके लिए भी सरकार से मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, मरीजों से बिना मंजूरी के पैसे लेने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

हालांकि, इन नियमों का असर तभी दिखेगा जब इन्हें सख्ती से लागू किया जाए। अभी भी कई कंपनियां इन नियमों को दरकिनार कर मरीजों को ठग रही हैं। इसलिए, मरीजों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। उन्हें किसी भी इलाज से पहले उसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए और सरकारी मंजूरी की जांच करनी चाहिए।

भविष्य में, जब स्टेम सेल थेरेपी के और भी शोध होंगे और इसके फायदे साबित होंगे, तब शायद यह एक कारगर इलाज बन सके। लेकिन तब तक, मरीजों को सतर्क रहने की जरूरत है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्या स्टेम सेल थेरेपी वाकई में कारगर है? उत्तर: फिलहाल, स्टेम सेल थेरेपी अभी शोध के चरण में है। कुछ मामलों में इसके सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं, लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह हर बीमारी का इलाज है। कई बार इसका कोई असर नहीं होता।

प्रश्न: क्या स्टेम सेल थेरेपी कानूनी है? उत्तर: भारत में, स्टेम सेल थेरेपी को सिर्फ कुछ खास मामलों में ही मंजूरी दी गई है, जैसे कि कुछ खास बीमारियों के इलाज के लिए। बिना सरकारी मंजूरी के यह थेरेपी करना अवैध है।

प्रश्न: स्टेम सेल थेरेपी से पहले क्या सावधानी बरतनी चाहिए? उत्तर: किसी भी स्टेम सेल थेरेपी से पहले उसकी पूरी जानकारी लें। जांच लें कि क्या वह कंपनी सरकार से मान्यता प्राप्त है। किसी भी ऐसे वादे पर भरोसा न करें जो बहुत अच्छा लगे। अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

स्रोत URL: https://www.163.com/money/article/KV4O6JQO00258105.html

स्रोत URL: https://www.163.com/money/article/KV4O6JQO00258105.html

टैग

#स्टेम सेल#स्टेम सेल थेरेपी#स्वास्थ्य#सावधानी#भारत#इलाज

संबंधित लेख

2026 में A-शेयर ESG सामाजिक उत्तरदायित्व रैंकिंग: कौन आदर्श, कौन विवादित?
news

2026 में A-शेयर ESG सामाजिक उत्तरदायित्व रैंकिंग: कौन आदर्श, कौन विवादित?

जानें 2026 की A-शेयर ESG सामाजिक उत्तरदायित्व सूची में कौन सी कंपनियाँ शीर्ष पर हैं और किन पर विवाद है। सेक्टर विश्लेषण और निवेश पर प्रभाव सहित।

#esg#सामाजिक उत्तरदायित्व#a-शेयर
डेक्सट्रस हाथ की कीमत 100 लाख से घटकर 3 लाख, चीन का निर्यात अमेरिका में
news

डेक्सट्रस हाथ की कीमत 100 लाख से घटकर 3 लाख, चीन का निर्यात अमेरिका में

चीनी कंपनी इंशी रोबोट ने डेक्सट्रस हाथ की कीमत 100 लाख से घटाकर 3 लाख रुपये कर दी है। जानिए कैसे यह तकनीक अमेरिका को निर्यात हो रही है और रोबोटिक्स उद्योग पर इसका क्या असर पड़ेगा।

#डेक्सट्रस हाथ#रोबोटिक्स#चीन
शियाओहोंगशू IPO: पूर्व कर्मचारी की शिकायत से उठे कॉर्पोरेट प्रशासन के सवाल
news

शियाओहोंगशू IPO: पूर्व कर्मचारी की शिकायत से उठे कॉर्पोरेट प्रशासन के सवाल

शियाओहोंगशू के संभावित हांगकांग IPO से पहले पूर्व कर्मचारी की शिकायत ने VIE संरचना, कर्मचारी स्टॉक विकल्प और सूचना प्रकटीकरण जैसे मुद्दों को उजागर किया है। जानें इसका असर और आगे की राह।

#शियाओहोंगशू#IPO#VIE संरचना